लोकडाउन 4.0 को लेकर सरकार को मिले सुझाव

लोकडाउन 4.0 को लेकर सरकार को मिले सुझाव

भोपाल| गृह, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) ने मंत्रालय से वीडियो कांफ्रेंस द्वारा उज्जैन (Ujjain) भोपाल (Bhopal) विदिशा (Vidisha) झाबुआ (Jhabua) और रतलाम (Ratlam) के जन-प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और जिला आपदा प्रबंधन समूह से चर्चा की। लॉक डाउन 4.0 (Lockdown) कैसा हो इसको लेकर जनप्रतिनिधियों ने सुझाव दिए हैं|

मीडिया से चर्चा में मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि संक्रमित इलाको को छोड़कर बाकी शहर को खोलने के सुखाव आये है| फीवर क्लिनिक खोलने का सुझाव है, जंहा लोग आकर अपनी बीमारी दिखा सके| उन्होंने कहा लॉक डाउन को लेकर कलेक्टरों से भी मीटिंग हुई है उन्होंने भी सुझाव दिए हैं| ग्रीन ऑरेंज और रेड जोन को लेकर चर्चा की गई| सुझाव मिले हैं कि रेड जोन भी खोले जाएं लेकिन कंटेंटमेंट एरिया को छोड़कर| हालांकि भीड़भाड़ वाले इलाके बंद किये जाएँ| जिसमें शॉपिंग मॉल ,विवाह, शादी समारोह शोभायात्रा और तमाम चीजें शामिल है| रेड जोन में भी कन्टेनमेंट एरिया छोड़कर कामकाज शुरू करने का सुझाव आया है|

डॉ नरोत्तम मिश्रा ने कहा पिछले 8 से दस दिन मे जहां कोई नए केस नही आ रहे है उन स्थान को ग्रीन जोन कर देना चाहिए यह सुझाव आया है| वहीं उन्होंने मजदूरों को लेकर कहा

अभी तक 59 ट्रेन आई है| कई जिलो मे अब जो केस आ रहे है वो प्रदेश के नही प्रवासी मजदुर है| कल फरीदाबाद से एक ट्रेन चलनी थी वहाँ से आने वाले करीब 700 मजदूर इसलिए वापस चले गए कि उनको वहाँ सूचना मिली कि हमारी फेक्ट्री चालू हो गई है तो वो वापस चले गए, सिर्फ 600 मजदूर बचे, फिर उन्हे बस से भेजा है|

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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