कमलनाथ बोले, क्या लॉकडाउन के नियम सिर्फ गरीबों के लिए है, भाजपा नेताओ के लिए नहीं ?

कमलनाथ बोले, क्या लॉकडाउन के नियम सिर्फ गरीबों के लिए है, भाजपा नेताओ के लिए नहीं ?

भोपाल| लॉकडाउन (Lockdown) के बीच भाजपा प्रदेश कार्यालय (BJP State Office) में रायसेन (Raisen) के 200 कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा की सदस्यता ली| लॉकडाउन के दौरान जहां आमजन से घरों में रहने की अपील की जा रही है, ऐसे में भाजपा कार्यालय में पहुंची भीड़ पर कांग्रेस (Congress) ने सवाल उठाये हैं| पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा क्या लॉकडाउन के नियम सिर्फ़ ग़रीबों, आमजन के लिये है, भाजपा के नेताओ पर यह नियम लागू नहीं होते है ?

कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा- ‘शिवराज जी कल कोरोना की समीक्षा के दौरान नियमो के पालन पर आप प्रदेशवासियो को सख़्त चेतावनी दे रहे थे। प्रदेश में आमजन के लिये इस लॉकडाउन में शादी समारोह हो या गमी हो संख्या तय है।सभी आमजन नियमो का पालन भी कर रहे है, नियमो के उल्लंघन पर उन पर तुरंत कार्यवाही भी हो रही है। वही आपके भाजपा कार्यालय में आज लॉकडाउन में आपकी व अन्य ज़िम्मेदार भाजपा नेताओ की उपस्थिति में एक भीड़भरा कार्यक्रम आयोजित होता है , नियमो का जमकर मखौल उड़ता है , सोशल डिस्टन्सिंग का ज़रा भी पालन नहीं होता है ? इसके पूर्व भी ऐसा कई बार हो चुका है।

क्या आमजन की तरह कार्रवाई होगी
पूर्व सीएम ने अन्य ट्वीट में लिखा- ‘क्या मोदी जी के लॉकडाउन के नियम सिर्फ़ ग़रीबों , आमजन के लिये है , आपकी पार्टी के नेताओ पर यह नियम लागू नहीं होते है ? क्या इसके दोषियों पर आमजन की तरह ही कार्यवाही होगी’

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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