नई व्यवस्था: भोपाल में अब नंबर के आधार पर खुलेंगी दुकानें

नई व्यवस्था: भोपाल में अब नंबर के आधार पर खुलेंगी दुकानें

भोपाल| लॉकडाउन (Lockdown) में मिली छूट के बाद भोपाल (BHopal) में अब नए नियम के तहत दुकानें खुलेंगी| अब सभी दुकानों पर अलग-अलग 1, 2 ,3 नम्बर अंकित किये जायेंगे। इन नम्बरों के हिसाब से दिन तय किये गए हैं| कलेक्टर तरुण पिथोड़े (Tarun Pithode) ने बुधवार को धारा-144 के तहत आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए भोपाल के शहरी क्षेत्र में दुकान नम्बर के आधार पर खोले जाने के आदेश जारी किए है।

एक नंबर अंकित की हुई दुकान सोमवार एवं मंगलवार, दो नंबर अंकित की हुई दुकान बुधवार एवं गुरुवार और तीन नंबर अंकित की हुई दुकान शुक्रवार एवं शनिवार को खोली जायेंगी और शहरी क्षेत्र में स्थित दुकानें रविवार के दिन बंद रहेंगी। यह आदेश ऐसे सभी मार्केट क्षेत्र में जहाँ 10 या 10 से अधिक दुकानें है सहित सभी मार्केट पर लागू होगा।

रात 8:30 बजे तक बंद होंगी सभी दुकानें
सभी दुकानों पर यह नम्बर नगर निगम द्वारा अंकित किए जाएंगे। जब तक नम्बर अंकित नही होते है तब तक पूर्व में जारी किए आदेश अनुसार दुकानें खोली जाएंगी। इसके अतिरिक्त मेडिकल स्टोर, स्टैंड अलोन दुकाने, रहवासी परिसर में स्थित दुकाने, राज्य शासन से लायसेंस प्राप्त दुकाने, सामान्य स्थिति में खुली रहेंगी। मेडिकल दुकानो को छोड़कर शेष दुकानों को रात्रि 8:30 बजे तक बंद किया जाएगा। ताकि रात्रि कर्फ्यू का पालन कड़ाई से सुनिश्चित किया जा सके। मार्केट क्षेत्र की दुकानों पर नंबरिंग अंकित नहीं हो जाती तब तक पूर्व अनुसार ही संचालित की जाएगी।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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