शराब ठेकेदारों को मनाने अब सरकार की ओर से आया यह प्रस्ताव

शराब ठेकेदारों को मनाने अब सरकार की ओर से आया यह प्रस्ताव

भोपाल| शायद ऐसा देश में पहली बार हो रहा हो जब सरकार (Government) इस बात को लेकर परेशान है कि शराब (Liquor) की दुकानें नहीं खुल रही और ठेकेदार है कि दुकान खोलने को तैयार नहीं । दरअसल पूरा मामला राजस्व revenue से जुड़ा है ।शराब से मध्य प्रदेश (Madhya pradesh) की सरकार को एक बड़े हिस्से के राजस्व की आय होती है जिसके चलते सरकार परेशान है कि आखिरकार कैसे शराब ठेकेदार दुकानों को जल्द खोलें| लेकिन ठेकेदारों का कहना है कि मार्च और अप्रैल में बंद रही दुकानों के चलते उन्हें जो हानि उठानी पड़ रही है उसकी पूर्ति सरकार करें नहीं तो अभी दुकाने नहीं खुलेंगी।

सरकार की ओर से उन्हें मनाने की कोशिशें लगातार जारी है। अब एक नए प्रस्ताव (Proposal) में सरकार ने शराब ठेकेदारों को यह आश्वासन दिया है उनके दो माह के घाटे की पूर्ति के लिए उन्हें अगले वर्ष अप्रैल और मई में भी शराब की दुकानें चलाने की अनुमति दी जाएगी| जबकि वर्तमान में अनुमति केवल वित्तीय वर्ष 2020-21 यानी मार्च 2021 तक के लिए है। हालांकि इसके लिए शराब ठेकेदारों को दस माह की ड्यूटी देनी होगी।

अब शराब ठेकेदार इस बात के लिए तो राजी हो गए हैं लेकिन अभी भी उन्होंने हाईकोर्ट (High Court) में जो मामला लगा रखा है उसके निर्णय का उन्हें इंतजार है जिसमें उन्होंने सरकार से होने वाले घाटे की पूर्ति की मांग की है। अब इस बात की उम्मीद बन गई है कि शराब ठेकेदार जल्द दुकान खोल देंगे और सरकार के साथ-साथ सुरा प्रेमियों की आशा भी पूरी हो सकेंगी।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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