मध्यप्रदेश में चढ़ा सियासी पारा, कैलाश-नरोत्तम के बीच डिनर डिप्लोमेसी

मध्यप्रदेश में चढ़ा सियासी पारा, कैलाश-नरोत्तम के बीच डिनर डिप्लोमेसी

भोपाल| कोरोना (Corona) से परे मध्यप्रदेश (Madhyapradesh) में राजनीतिक पारा तेजी के साथ परवान चल रहा है | मध्य प्रदेश में आने वाले समय में विधानसभा की 24 सीटों पर उपचुनाव (BY Election) होने हैं और इसके लिए कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने अपनी अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं | इन सब के बीच मध्य प्रदेश के गृह और स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) के चार इमली स्थित निवास पर आज शाम मध्य प्रदेश बीजेपी के कद्दावर नेता और राष्ट्रीय भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) पहुंचे बंद कमरे में कैलाश और नरोत्तम के बीच आधे घंटे बातचीत हुई|

सूत्रों की मानें तो इस उपचुनाव में पार्टी कैसे ज्यादा से ज्यादा सीटें जीत सके और पार्टी के भीतर उभर रहे असंतोष को कैसे दूर किया जाए इस मुद्दे को लेकर दोनों कद्दावर नेताओं के बीच गहन चर्चा हुई | ग्वालियर चंबल संभाग और मालवा की सीटों को लेकर विशेष रणनीति बनाने पर दोनों नेताओं ने जोर दिया| हालांकि दोनों नेताओं के बीच इस बातचीत को मध्य प्रदेश में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार से भी जोड़कर देखा जा रहा है |

15 दिन के भीतर यह तीसरा मौका है जब बीजेपी का कोई राष्ट्रीय स्तर का नेता नरोत्तम के निवास पर पहुंचा हो| इससे पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर डॉ मिश्रा के साथ चर्चा कर चुके हैं| वहीं गुरुवार को कैलाश डॉ मिश्रा के बंगले पर रात्रि भोज के लिए पहुंचे । दोनों ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जिसमें राजनीतिक चर्चा भी शामिल हैं।
डॉ. मिश्रा ने श्री विजयवर्गीय का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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