उपचुनाव से पहले तोमर और नरोत्तम की जुगलबंदी से चढ़ा सियासी पारा

उपचुनाव से पहले तोमर और नरोत्तम की जुगलबंदी से चढ़ा सियासी पारा

भोपाल|रविंद्र सिंह राजपूत|  राज्यसभा चुनाव के बाद अब राजनीतिक दल उपचुनाव (BY-Election) को लेकर तैयारियां में जुट गए हैं| उपचुनाव की तैयारियों को लेकर बीजेपी का मंथन शुरू हो गया है। इसी सिलसिले में शुक्रवार को भाजपा (BJP) के दो दिग्गज नेताओं ने मुलाकात की| केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) शुक्रवार को प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) के राजधानी में स्थित बंगले पर पहुंचे| दोनों के बीच ग्वालियर चम्बल (Gwalior-Chambal) की विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर रणनीतिक चर्चा हुई| वहीं केंद्रीय मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत अभियान और राज्य में कृषि को और अधिक उन्नत बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी चर्चा की।

मध्यप्रदेश में 24 विधानसभा सीटों पर होने वाले आगामी उपचुनाव को लेकर बीजेपी कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती| खासकर ग्वालियर चंबल की 16 सीटें पर पार्टी का ख़ास फोकस है| यही कारण है कि पार्टी ने भाजपा में संकटमोचक की भूमिका निभाने वाले मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा को आगे कर दिया है| जो उपचुनाव से पहले ग्वालियर-चंबल संभाग के नेताओं की नाराजगी दूर कर सबको साथ लाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं| इस बीच नरोत्तम मिश्रा और नरेंद्र सिंह तोमर की मुलाकात से सियासी पारा चढ़ गया है|

दोनों ग्वालियर चम्बल के दिग्गज नेता है, तोमर और नरोत्तम की जुगलबंदी कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है| दोनों की मुलाक़ात इसलिए भी ख़ास मानी जा रही है कि हालही में नरोत्तम मिश्रा ने ग्वालियर का दौरा किया था| उपचुनाव को लेकर आगे की रणनीति क्या होगी इसको लेकर दोनों नेताओं के बीच मंथन चल रहा है| यह क्षेत्र कांग्रेस छोड़ भाजपा में आये ज्योतरादित्य सिंधिया का भी गढ़ है, सिंधिया के भाजपा में आने से कांग्रेस की पकड़ यहां कमजोर हुई है| वहीं तोमर और नरोत्तम की यह जुगलबंदी आने वाले समय में बड़े उलटफेर के संकेत दे रही है| जिसका असर कांग्रेस की तैयारियों पर पड़ सकता है|

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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