पान की पीक सड़क पर थूकना पड़ा ढाई हजार का

पान की पीक सड़क पर थूकना पड़ा ढाई हजार का

भोपाल। आदत से मजबूर दूध वाले को सड़क पर धूकना पड़ गया 2500 का….. सुनकर थोडे हैरान हो गए होंगे आप…दरअसल शहर के जहांगीराबाद इलाके के जोन 8 के वार्ड 34 इलाके में शफीक नाम के व्यक्ति द्वारा थूकने पर निगम ने स्पॉट फाइन (Spot Fine) की कार्रवाई की है| शफीक ने सड़क पर जाते समय पान की पीक बिना कुछ सोचे थूक दी| जिसके बाद वहां मौजूद नगर निगम के एएचओ अजय श्रवण ने उस दूध वाले की क्लास लगा दी| अजय श्रवण ने शफीक को सभी के सामने ना केवल फटकार लगाई बल्कि उससे उसका थूका हुआ भी साफ कराया| इतना ही नहीं मौके पर निगम की तरफ से चालानी कार्रवाही करते हुए 2500 हजार का स्पॉट फाइन भी किया गया|

गौरतलब है कि जहांगीराबाद (Jahangirabad) फिलहाल भोपाल (Bhopal) के सबसे ज्यादा संक्रमित कोरोना मरीजों का गढ बना हुआ है| वहां से अब तक 141 कोरोना के मरीज सामने आ चुके हैं| उसके बाद भी इस तरह की लापरवाही इस इलाके में करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है|

भोपाल में सार्वजनिक स्थान पर थूकने पर है फाइन
भोपाल में कोरोना के मरीजों की बढती संख्या देख जिला कलेक्टर ने सार्वजनिक स्थानों पर थूकने (Spitting) वाले पर जुर्माना लगाने के आदेश अप्रैल में ही जारी कर दिए थे| आदेश के अनुसार अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थानों पर थूकता हुआ पाया जाता है तो उस पर 1000 हजार रूपए का जुर्माना लगाया जाएगा| जिसके बाद शहर में लगातार लोगों के चालान काटे जा रहे हैं| बता दें कि यह आदेश इसलिए निकाला गया था क्योंकि सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से कोरोना का संक्रमण फैलने का खतरा कई गुना बढ जाता है|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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