भोपाल, इंदौर, उज्जैन संभाग के जिलों में 50 % क्षमता, अन्य जिलों में सामान्य रूप से चलेंगी बसें

भोपाल, इंदौर, उज्जैन संभाग के जिलों में 50 % क्षमता, अन्य जिलों में सामान्य रूप से चलेंगी बसें

भोपाल| कोरोना संक्रमण के चलते मध्य प्रदेश में फिलहाल अंतरराज्यीय बसें नहीं चलेंगी| अंतरराज्यीय बसों (Interstate buses) का संचालन 30 जून तक बंद रहेगा। सरकार ने निर्णय लिया है कि अभी शैक्षणिक संस्‍थाओं को बंद रखा जाएगा| प्रदेश के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) ने इस सम्बन्ध में जानकारी दी| गृह विभाग ने सभी कलेक्टरों को इस सम्बन्ध में निर्देश जारी किये हैं|

मंत्री डॉ.मिश्रा ने बताया कि राज्य के भीतर इंदौर, उज्जैन एवं भोपाल संभाग के सभी जिलों में 30 जून तक यात्री बसों का संचालन 50 प्रतिशत क्षमता के साथ एवं अन्य जिलों में सामान्य रूप से किया जाएगा| वहीं भोपाल नगर निगम क्षेत्र में सभी प्रकार की दुकान सप्ताह में 5 दिन तथा इंदौर एवं उज्जैन नगर निगम क्षेत्र में डिस्ट्रिक्ट क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप के परामर्श के अनुरूप खुलेगी| नगर निगम की सीमा के बाहर स्थित सभी प्रकार की दुकाने सामान्य स्थिति में खुली रहेगी| स्कूल, कॉलेज, शिक्षण संस्थाएं आगामी आदेश तक बंद रहेंगे|

उन्होंने बताया इंदौर, भोपाल और उज्जैन नगर निगम क्षेत्र में शासकीय संभागीय एवं जिला कार्यालय एवं निजी कार्यालय 50% कर्मचारियों के साथ एवं अन्य स्थानों पर कर्मचारियों की पूरी क्षमता के साथ खुलेंगे| सभी शासकीय कार्यालयों में अधिकारियों की उपस्थित शत प्रतिशत रहेगी| वहीं रात 9 बजे से सुबह 5 बजे तक अत्‍यावश्‍यक सेवाओं को छोड़कर सभी गति‍विधियां प्रति‍बंधित रहेंगी।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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