रायसेन में 11–13 अप्रैल तक उन्नत कृषि महोत्सव, कचरे से कंचन, प्राकृतिक खेती, FPO और आधुनिक तकनीकों पर होगा मंथन

महोत्सव के दौरान किसान अपने खेत की मिट्टी के नमूने लाकर वहीं जांच करवा सकेंगे। ग्राफ्टिंग, उन्नत नर्सरी, हाई-टेक बागवानी, हाइड्रोपोनिक्स और समेकित कृषि प्रणाली के लाइव मॉडल प्रदर्शित किए जाएंगे। ड्रोन तकनीक और नैनो-उर्वरक छिड़काव का सीधा प्रदर्शन किसानों को कम लागत और सटीक खेती के नए विकल्पों से भी परिचित कराएगा।
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फाइल फोटो

रायसेन में कृषक कल्याण के तहत 11 से 13 अप्रैल तक तीन दिवसीय “उन्नत कृषि महोत्सव” का आयोजन होने जा रहा है। इस महोत्सव का उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और बाजार आधारित कृषि के प्रति जागरूक करना है जिससे ताकि उनकी आय और उत्पादकता में बढ़ोत्तरी हो सके।

महोत्सव में प्रदर्शनी और प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को देश के प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। साथ ही “कचरे से कंचन” की अवधारणा पर आधारित पराली प्रबंधन तकनीकों को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे कृषि अपशिष्ट को आय के स्रोत में बदला जा सके।

पहले दिन फसल प्रबंधन और डिजिटल कृषि पर फोकस

11 अप्रैल को आयोजित सत्रों में फसल कटाई के बाद प्रबंधन, कृषि अवसंरचना कोष के उपयोग, डिजिटल कृषि और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही मधुमक्खी पालन, कृषि यंत्रीकरण, दलहन फसलों की उत्पादकता बढ़ाने और प्राकृतिक खेती जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी। नुक्कड़ नाटकों के जरिए किसानों को पराली प्रबंधन और वेस्ट-टू-वेल्थ मॉडल की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी।

दूसरे दिन FPO मीट और आधुनिक खेती तकनीकों पर विशेष सत्र

12 अप्रैल को किसान उत्पादक संगठनों (FPO) का सम्मेलन आयोजित होगा, जिसमें सामूहिक खेती और बाजार से जुड़ाव पर चर्चा होगी। इसके अलावा मृदा स्वास्थ्य, पॉलीहाउस और शेडनेट जैसी संरक्षित खेती, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर जागरूकता सत्र भी होंगे। दोपहर के सत्रों में एकीकृत कृषि प्रणाली, पोषक तत्व प्रबंधन, सब्जी और फूलों की वैज्ञानिक खेती, बायो-पेस्टीसाइड, सूक्ष्म सिंचाई, फर्टिगेशन, हाइड्रोपोनिक्स, प्रिसिजन और वर्टिकल फार्मिंग जैसे आधुनिक विषयों पर विशेषज्ञ जानकारी देंगे।

तीसरे दिन पशुपालन मत्स्यपालन पर चर्चा

13 अप्रैल को धान उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए बीज प्रणाली, मत्स्य पालन और मोती पालन पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। साथ ही कृषि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड पर भी विस्तार से जानकारी दी जाएगी।दोपहर के सत्रों में डेयरी विकास, पशुपालन, धान की सीधी बुवाई, मुर्गी और बकरी पालन से आय वृद्धि जैसे विषयों पर चर्चा होगी। “धरती बचाओ” थीम पर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से टिकाऊ और जलवायु-संतुलित खेती का संदेश दिया जाएगा।

पराली प्रबंधन और लाइव डेमो होंगे आकर्षण का केंद्र

महोत्सव में पराली प्रबंधन को लेकर विशेष फोकस होगा। “कचरे से कंचन” की अवधारणा के तहत किसानों को दिखाया जाएगा कि पराली और कृषि अपशिष्ट को जलाने की बजाय कैसे खाद, ऊर्जा और अतिरिक्त आय का स्रोत बनाया जा सकता है। वेस्ट-टू-वेल्थ मॉडल के साथ नुक्कड़ नाटक के माध्यम से पर्यावरणीय नुकसान और आर्थिक फायदे को सरल भाषा में समझाया जाएगा। कृषि मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा तैयार नुक्कड़ नाटक भी विभिन्न स्थानों पर प्रस्तुत किए जाएंगे।

इसके अलावा किसानों द्वारा लाए गए मिट्टी के नमूनों की जांच कर उन्हें मृदा स्वास्थ्य रिपोर्ट दी जाएगी जिससे वे अपनी फसलों के लिए सही पोषण प्रबंधन कर सकें। महोत्सव में ग्राफ्टिंग, नर्सरी प्रबंधन, हाइड्रोपोनिक्स, हाई-टेक हॉर्टिकल्चर और समेकित कृषि प्रणाली के लाइव मॉडल भी प्रदर्शित किए जाएंगे।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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