एमपी में महिलाओं के बाद अब शिक्षकों की भी शराब बेचने लगाई ड्यूटी

एमपी में महिलाओं के बाद अब शिक्षकों की भी शराब बेचने लगाई ड्यूटी

भोपाल| शराब दुकानों (Liquor Shop ) पर महिला पुलिसकर्मियों (Lady Police) की ड्यूटी लगाए जाने के बाद अब शिक्षकों (Teachers) की ड्यूटी पर बवाल मच गया है| अब सागर (Sagar) में पॉलिटेक्निक कॉलेज के शिक्षकों की शराब दुकानों पर ड्यूटी लगा दी गई| कॉलेज की ओर से बकायद कलेक्टर (आबकारी) का हवाला देते हुए शिक्षकों के नाम के साथ आदेश जारी कर दिया गया| मामले सामने आने के बाद बवाल मच गया| इस पर कांग्रेस ने सख्त ऐतराज जताया है। विरोध के बाद कलेक्टर द्वारा शिक्षकों की ड्यूटी के आदेश निरस्त किये जाने की खबर है|

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा (Sajjan singh Verma) ने ट्वीट कर शिक्षकों की शराब दुकानों पर ड्यूटी का विरोध किया| उन्होंने ट्वीट कर लिखा- ‘कुछ तो शर्म करो शिवराज, महिलाओं को शराब दुकानों पर बैठाने से भी तुम्हारा पेट नहीं भरा और अब शिक्षकों को शराब की दुकान पर बैठा रहे हो। इससे ज्यादा शर्मनाक और निंदनीय प्रदेश में कुछ और नहीं हो सकता। जनता ही जल्दी इस सत्ता के नशे को उतारेगी’।

बता दें कि इससे पहले आबकारी विभाग ने शराब दुकानों पर महिला पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई थी| जिसको लेकर काफी बवाल मचा हुआ है| इस बीच शिक्षकों की ड्यूटी भी शराब बेचने के लिए लगाई गई तो एक बार फिर सियासत तेज हो गई ओर कांग्रेस इसको लेकर सरकार की घेराबंदी कर रही है| हालाँकि बताया जा रहा है कि विरोध के बाद सरकार ने शिक्षकों की शराब दुकानों पर ड्यूटी निरस्त कर दी है और आगे से इन दुकानों के संचालन के लिए आबकारी विभाग के अलावा केवल पुलिस, होमगार्ड के कर्मचारियों की ही सेवाएं लेने का फैसला किया गया है|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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