अतिथि विद्वानों ने सरकार के रवैये से निराश होकर मांगी अपने अंग बेचने की अनुमति

अतिथि विद्वानों ने सरकार के रवैये से निराश होकर मांगी अपने अंग बेचने की अनुमति

भोपाल। अतिथि विद्वानों के आंदोलन को दो माह हो चुके हैं लेकिन अब तक मामला बेनतीजा ही है। ये सरकार से वचनपत्र में किये गए वादे के अनुसार नियमितिकरण की मांग कर रहे हैं लेकिन नियमत करना तो दूर, जहां पीएससी से भर्ती की जा रही है वहां से इन्हें फालेन आउट किया जा रहा है। अब तक करीब 2700 अतिथि विद्वानों को फालेन आउट कर घर बैठा दिया गया है। इनका कहना है कि सरकार इन्हें चाइस फिलिंग के नाम पर बहलाना चाहती है। अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के संयोजक डॉ देवराज सिंह ने कहा है कि प्रदेश के सभी अतिथि विद्वान और संघर्ष मोर्चा राज्य सरकार और उच्च शिक्षा विभाग द्वारा थोपी जा रही पक्षपातपूर्ण और भ्रामक चॉइस फिलिंग प्रक्रिया का कड़ा विरोध करते हैं। इनका कहना है कि चॉइस फिलिंग से इनका भविष्य बचने की बजाय और बर्बाद हो जाएगा।

मोर्चा संयोजक डॉ सुरजीत भदौरिया ने कहा है कि उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी एक तरफ तो ये कह रहे हैं कि अतिथि विद्वान को बाहर नहीं किया जाएगा वहीं दूसरी तरफ 2700 अतिथि विद्वानों को निकाला जा चुका है और चॉइस फिलिंग पहले करीब 1200 पदों के लिये थी और अबर नए शेड्यूल  के मुताबिक लगभग 680 पदों पर की जा रही है। अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के प्रवक्ता डॉ मंसूर अली ने कहा है  पिछले आठ महीने से इन्हें मानदेय नहीं मिला है और अब इनके घरों में घोर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उसपर भी सरकार इनके लिये कोई कारगर समाधान नहीं खोज रही है जिससे परेशान होकर अतिथि विद्वानों ने राज्यपाल को पत्र लिखकर अपने अंग बेचने की अनुमति तक प्रदान करने की मांग कर डाली है। अभी कुछ समय पूर्व ही इनके साथी राजकुमार अहिरवार के इकलौते पुत्र की दुखद मृत्यु हो गई थी और अब एक और अतिथि विद्वान संदीप अठ्या के एक माह के बच्चे की बीमारी से मौत हो गई। इस तरह आर्थिक संकट से गुज़र रहे अतिथि विद्वान अब सरकार के रवैये से परेशान होकर आर पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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