उपचुनाव से पहले असंतुष्टों को साधने शिवराज का मास्टर स्ट्रोक

उपचुनाव से पहले असंतुष्टों को साधने शिवराज का मास्टर स्ट्रोक

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट
स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) से एक दिन पहले हुई शिवराज कैबिनेट (Shivraj Cabinet Meeting) की अहम बैठक में मध्य प्रदेश सहकारी सोसायटी संशोधन अधिनियम 2020 को मंजूरी मिल गई है| इसके बाद अब जिला सहकारी बैंकों और अपेक्स बैंक में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष तथा इनसे जुड़ी सहकारी समितियों में सरकार से जुड़े राजनीतिक व्यक्तियों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया| अब विधायक-सांसद कोऑपरेटिव संस्था में प्रशासक बन सकेंगे|

यहां पर अब शासक के साथ सलाहकार समितियों में भी लोग एडजस्ट हो सकेंगे| इसके साथ ही सहकारी समिति की केपीसीटी लिमिट 25% बढ़ाई जा सकेगी| पार्टी में असंतुष्टों को साधने इसे सरकार का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है|

मंत्रिमंडल विस्तार में जगह नहीं बना पाए कई विधायक, नाराज चल रहे हैं| इसके अलावा चुनाव में टिकट न मिल पाने और कई वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी समय समय पर सामने आ चुकी है| ऐसे में इन नेताओं को सहकारी बैंकों और अपेक्स बैंक में नियुक्ति देकर एडजस्ट किया जा सकता है|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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