भोपाल बयार संस्कृति महोत्सव में नाटक “खिड़की” का मंचन, दर्शकों की भरपूर सराहना मिली

नाटक ने अंत तक दर्शकों को बांधे रखा। ये एक लेखक की ऐसी कहानी है जो सपनों और हकीकत के बीच झूल रहा है। गरीबी में घिरा यह लेखक हर रात बेस्ट राइटर अवॉर्ड जीतने का सपना देखता है, लेकिन सुबह होते ही हाथ में अवॉर्ड की जगह झाड़ू होती है। उसकी खिड़की के बाहर एक लड़की वेदिका दिखती है, जो उसकी कल्पनाओं की नई नायिका बन जाती है। नाटक ने दर्शकों को हंसाया भी, गुदगुदाया भी और सोचने पर भी मजबूर किया।
Rang Shri Little Ballet Troupe Bhopal

Bhopal Bayar Cultural Festival : बयार सोशल वेलफेयर सोसाइटी, भोपाल द्वारा आयोजित “बयार संस्कृति महोत्सव-1” में रंग श्री लिटिल बैले ट्रूप सभागार में  नाटक “खिड़की” का मंचन किया गया। “दी आर्ट रिवोल्यूशन” बैनर तले हुए इस नाटक को लिखा है विकास बहारी और निर्देशन किया आशीर्वाद झा ने। दर्शकों ने इस नाटक को खूब सराहा।

नाटक में उद्देश्य अगरैया, दुर्गा सिंह (रिया), लोकेंद्र शर्मा, अंकित गंगराड़े और सानिया गुप्ता ने अभिनय किया। वहीं मंच व्यवस्थापक, सानिया गुप्ता और रोशन विश्वकर्मा रहे। संगीत दिया आमिर खान व गंगा शर्मा ने। प्रकाश परिकल्पना सानिया गुप्ता की थी और रूपसज्जा रिया सिंह और दीपेश अगरैया की। नाटक की क्रिएटिव टीम में लेखक, विकास बहारी और निर्देशक आशीर्वाद झा रहे।

नाटक की रोचक कहानी

“खिड़की” एक ऐसे लेखक (उद्देश्य) की कहानी है, जो अपनी लेखनी में नई कहानी गढ़ने की जद्दोजहद में लगा है। गरीबी और मुफलिसी के कारण वह किराए के मकान में रहता है। नाटक की शुरुआत लेखक के सपने से होती है, जिसमें उसे बेस्ट राइटर अवॉर्ड मिलता है और वह मंच पर भाषण देता है। लेकिन सपना टूटते ही उसे एहसास होता है कि उसके हाथ में अवॉर्ड नहीं, बल्कि झाड़ू है। यह सपना वह रोज देखता है। तभी उसका मकान मालिक चौपड़ा (लोकेंद्र शर्मा) आता है, जो महीनों से किराया न मिलने के कारण लेखक को धमकाता है और चला जाता है।

नाटक में लेखक की कल्पनाओं को उसकी सबसे बड़ी संपत्ति बताया गया है, जिसके कारण उसे पागल समझा जाता है। वह एक समानांतर दुनिया (पैरेलल यूनिवर्स) की कल्पना करता है, जो हमारी दुनिया से मिलती-जुलती है, लेकिन हादसों में थोड़ी अलग। कहानी आगे बढ़ती है, जब लेखक अपनी खिड़की से एक लड़की (रिया सिंह) को देखता है और उसके बारे में अनुमान लगाता है। बाद में उसे पता चलता है कि वह लड़की वेदिका है, जो हाल ही में किराए पर रहने आई है।

कहानी में ट्विस्ट

एक दिन लेखक को पता चलता है कि वेदिका वहां से जा चुकी है और नए लोग उस मकान में आ गए हैं। वह सोच में पड़ जाता है कि वेदिका कहां गई होगी। तभी उसके दरवाजे की घंटी बजती है और सामने वेदिका खड़ी होती है। लेखक के अनुमान के मुताबिक, वेदिका का अपने पहले बॉयफ्रेंड से झगड़ा हुआ और वह अपने दूसरे बॉयफ्रेंड के पास गई थी। लेकिन उसे अपने दरवाजे पर देखकर लेखक हैरान रह जाता है। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत शुरू होती है। अगले दिन लेखक शक्कर देने के बहाने वेदिका से मिलने जाता है। बातों के दौरान वेदिका एक कहानी सुनाती है, जिसमें एक जादूगर राजकुमारी का चेहरा बदल देता है और उसे महल में प्रवेश नहीं मिलता। अंत में एक फरिश्ता उसे दुखों से मुक्ति देता है। यह कहानी सुनाकर वेदिका बताती है कि उसे कहानियां पढ़ना पसंद नहीं, क्योंकि वे दुख देती हैं।

लेखक उसे समझाता है कि कहानियां सिर्फ कल्पना होती हैं और उन्हें वास्तविक जीवन से जोड़ने की जरूरत नहीं। नाटक का अंत दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है। अंत में एक कारपेंटर (अंकित गंगराड़े) लेखक के दरवाजे पर आता है, जिसे मकान मालिक ने खिड़की बनाने के लिए भेजा है और यहीं कहानी का रहस्य खुलता है। इस नाटक को दर्शकों की भरपूर सराहना मिली। ये नाटक कल्पना और वास्तविकता के बीच के अंतर को उजागर करता है। “बयार संस्कृति महोत्सव-1” का यह आयोजन कला और संस्कृति के प्रेमियों के लिए एक यादगार अनुभव साबित हो रहा है।

Rang Shri Little Ballet Troupe Bhopal

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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