भोपाल: सब्जी व्यापारी की मौत, 55 लोग कोरोना को मात देकर लौटे घर

भोपाल: सब्जी व्यापारी की मौत, 55 लोग कोरोना को मात देकर लौटे घर

भोपाल| राजधानी भोपाल में शुक्रवार का दिन थोड़ी ख़ुशी और थोड़ा दुःख भरा रहा| जहां अब तक पॉजिटिव मरीजों की संख्या 360 पहुँच गई है, वहीं करोद सब्जी मंडी के आलू प्याज व्यापारी अब्दुल गफ्फार की एम्स में इलाज के दौरान मौत हो गई| वे वेंटिलेटर पर थे, उनकी पत्नी दो बेटे भी कोरोना संक्रमित हैं| इधर, राहत भरी खबर यह है कि भोपाल में कोरोना को पराजित कर 55 लोग अपने घर लौट गए।

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कोरोना विजेताओं से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बात की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इन्हें कहा कि लोगों को बताये की कोरोना को पराजित किया जा सकता है।हर हाल में हौसला बनाये रखें।यह संदेश अपने आसपास सबको दे। सीएम ने कहा कि मप्र की इस पावन भूमि से पूरी दुनिया को यह संदेश जा रहा है कि हमने कोरोना को हराना सीख लिया है। इस महामारी में हमारे योद्धा अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और डॉक्टरों की मेहनत से आज अपने घरों को रवाना हुए हैं। आज तक 133 योद्धाओं ने कोरोना को परास्त कर बता दिया है कि यह सामान्य बीमारी है।

सभी लोग चिरायु अस्पताल से 55 कोरोना पॉजिटिव मरीज पूर्ण स्वस्थ होकर अपने घर के लिए रवाना हुए। कुछ दिन पहले 18 अप्रैल को 28 कोरोना योद्धा, 20 अप्रैल को 44 कोरोना योद्धा पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं । मुख्यमंत्री ने चिरायु अस्पताल के डायरेक्टर श्री गोयनका का का पुनः अभिनंदन करके उनके द्वारा प्रदान की जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की सराहना की और उन्हें भविष्य में अन्य मरीजों को भी इसी तरह पूर्णतः स्वस्थ करके डिस्चार्ज करने हेतु शुभकामनाएं भी दी।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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