भोपाल में EOW की बड़ी कार्रवाई: न्यू मित्र मंडल सहकारी संस्था में करोड़ों की धोखाधड़ी, कई पदाधिकारियों पर FIR दर्ज

भोपाल में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने न्यू मित्र मंडल गृह निर्माण सहकारी संस्था में हुए एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है। संस्था के 17 पदाधिकारियों और सहयोगियों के खिलाफ करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं, धोखाधड़ी और गबन के आरोप में FIR दर्ज की गई है। जांच में सरकारी राजस्व को भी करोड़ों का नुकसान पहुंचाने की बात सामने आई है।
EOW

भोपाल। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने राजधानी भोपाल की एक पुरानी सहकारी संस्था में करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा किया है। जांच एजेंसी ने न्यू मित्र मंडल गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित में कथित वित्तीय अनियमितताओं, धोखाधड़ी और गबन के मामले में संस्था के 17 पदाधिकारियों और सहयोगियों के खिलाफ एक विस्तृत जांच के बाद FIR दर्ज की है। इस मामले में कुल लेन-देन लगभग 40 करोड़ रुपये का होने का अनुमान है, जिससे संस्था और शासन दोनों को भारी आर्थिक क्षति हुई है।

EOW द्वारा दर्ज की गई FIR क्रमांक 36/26 में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और न्यासभंग/गबन शामिल हैं। जांच में संस्था के अलग-अलग समय के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, संचालक और अन्य जिम्मेदार लोगों की संलिप्तता के पर्याप्त सबूत मिले हैं।

करोड़ों का घोटाला, सरकारी खजाने को भी चूना

जांच के अनुसार, इस पूरे घोटाले से संस्था को लगभग 8 से 9 करोड़ रुपये की सीधी हानि का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा, पदाधिकारियों ने सरकारी खजाने को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया। जांच में यह बात सामने आई है कि संस्था के 28 भूखंडों की रजिस्ट्री करते समय उनके वास्तविक बाजार मूल्य को छिपाया गया और दस्तावेजों में काफी कम कीमत दर्शाई गई।

इस धोखाधड़ी के कारण शासन को स्टाम्प और राजस्व शुल्क के रूप में लगभग 4 से 5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। EOW का अनुमान है कि अगर बाजार दर को आधार माना जाए, तो इन भूखंडों का कुल लेन-देन करीब 40 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

कैसे सदस्यों को दिया गया धोखा?

यह संस्था वर्ष 1981 में सदस्यों को आवासीय भूखंड उपलब्ध कराने के नेक उद्देश्य से बनाई गई थी। सदस्यों से जमा की गई राशि से ग्राम बागमुगालिया में करीब 3.5 एकड़ जमीन खरीदी गई। लेकिन समय के साथ संस्था के पदाधिकारियों की नीयत बदल गई।

जांच में सामने आए कुछ प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं:

  • मुआवजे का गबन: वर्ष 1996 में सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई करीब 2 एकड़ भूमि का मुआवजा मूल सदस्यों को कभी नहीं दिया गया।
  • अवैध सदस्य और प्राथमिकता का उल्लंघन: वर्ष 2004 में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) से केवल 45 प्लॉट की स्वीकृति मिली थी। इसके बावजूद, पदाधिकारियों ने 45 से अधिक सदस्य बना लिए और मूल व पात्र सदस्यों को दरकिनार कर दिया।
  • नक्शे में अवैध संशोधन: अधिक मुनाफा कमाने के लिए वर्ष 2023 में स्वीकृत नक्शे में अवैध रूप से संशोधन किया गया। आवासीय भूखंडों को व्यावसायिक उपयोग में बदल दिया गया ताकि उन्हें ऊंची कीमतों पर बेचा जा सके।
  • रिकॉर्ड में हेराफेरी: संस्था की मीटिंग मिनट्स, लेखा-जोखा और सदस्यता रजिस्टर में भी गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं, जो एक सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करती हैं।

EOW के अधिकारियों ने बताया कि लंबे समय से मिल रही शिकायतों के आधार पर जांच शुरू की गई थी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद ही FIR दर्ज करने का निर्णय लिया गया। एजेंसी अब इस मामले में आगे की विस्तृत जांच कर रही है और आने वाले दिनों में कुछ गिरफ्तारियां भी संभव हैं।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
Banshika Sharma

कंटेंट राइटर

मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
Follow Us :GoogleNews