भोपाल किसान आंदोलन: सरकार से बनी सहमति, मूंग खरीदी और खाद व्यवस्था पर फैसले के बाद देर रात खाली हुईं सड़कें

भोपाल किसान आंदोलन ने बुधवार को राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित कर दी। दरअसल नर्मदापुरम से पैदल पहुंचे किसानों ने मूंग खरीदी, खाद वितरण और ई-टोकन व्यवस्था को लेकर सरकार पर दबाव बनाया।
भोपाल किसान आंदोलन: सरकार से बनी सहमति, मूंग खरीदी और खाद व्यवस्था पर फैसले के बाद देर रात खाली हुईं सड़कें

भोपाल में किसानों के बड़े आंदोलन के बाद देर रात स्थिति सामान्य होने लगी। नर्मदापुरम से पैदल मार्च करते हुए राजधानी पहुंचे किसानों ने कई प्रमुख मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के बाद सहमति बनने पर आंदोलन खत्म करने का फैसला लिया गया, जिससे शहर की प्रमुख सड़कों पर यातायात धीरे-धीरे बहाल हो गया।

दरअसल दिनभर चले प्रदर्शन ने राजधानी की रफ्तार पर असर डाला। कई अहम चौराहों और वीआईपी मार्गों पर लंबा जाम लगा रहा। पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से कई रास्तों पर बैरिकेडिंग की और ट्रैफिक को दूसरे मार्गों से डायवर्ट किया। शाम तक प्रशासन और किसान नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत हुई। सरकार की ओर से मूंग खरीदी की सीमा बढ़ाने और खाद वितरण से जुड़ी कुछ समस्याओं के समाधान का भरोसा मिलने के बाद किसानों ने धरना खत्म करने का ऐलान किया। इसके बाद देर रात प्रदर्शनकारी अपने-अपने जिलों के लिए रवाना होने लगे।

मूंग खरीदी और ई-टोकन बना आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा

दरअसल इस आंदोलन का सबसे बड़ा कारण किसानों की आर्थिक और खेती से जुड़ी मांगें थीं। प्रदर्शनकारी किसानों ने सरकार से मांग की कि समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीदी का दायरा बढ़ाया जाए ताकि अधिक से अधिक किसानों को लाभ मिल सके। साथ ही खाद वितरण में लागू ई-टोकन व्यवस्था को लेकर भी किसानों ने नाराजगी जताई। उनका कहना था कि तकनीकी दिक्कतों के कारण कई किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही थी, जिससे खेती प्रभावित हो रही थी।

सरकार ने बातचीत के दौरान बड़ा फैसला लेते हुए पात्र किसानों से मूंग खरीदी की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक करने की घोषणा की। इसके अलावा स्लॉट बुकिंग और खरीदी की अंतिम तारीख भी आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। ई-टोकन व्यवस्था को लेकर भी सरकार ने समीक्षा का भरोसा दिया और संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाने की बात कही। इन घोषणाओं के बाद किसान संगठनों ने इसे सकारात्मक पहल बताते हुए आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया। हालांकि किसान नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि तय फैसलों को समय पर लागू नहीं किया गया तो आगे फिर आंदोलन की रणनीति बनाई जा सकती है।

भोपाल ट्रैफिक रहा प्रभावित

वहीं किसान आंदोलन का असर केवल प्रदर्शन स्थल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे भोपाल की यातायात व्यवस्था पर पड़ा। रोशनपुरा, पॉलीटेक्निक चौराहा, मुख्यमंत्री निवास मार्ग और कई अन्य प्रमुख रास्तों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। प्रदर्शनकारियों को संवेदनशील इलाकों तक पहुंचने से रोकने के लिए बसों, डंपरों और लोहे के बैरिकेड लगाए गए। इससे आम लोगों को लंबा जाम और वैकल्पिक मार्गों का सामना करना पड़ा।

प्रदर्शन के दौरान कुछ जगह पुलिस और किसानों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। हालांकि हालात ज्यादा नहीं बिगड़े और प्रशासन ने बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित रखा। आंदोलन के दौरान किसानों ने सड़क पर दाल-बाटी बनाकर भोजन किया और अलग-अलग तरीकों से अपना विरोध दर्ज कराया। कुछ युवाओं ने हवन कर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश भी की। देर शाम जब समझौते की घोषणा हुई तो राजधानी में राहत का माहौल बना और ट्रैफिक धीरे-धीरे सामान्य होने लगा।

Banshika Sharma
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कंटेंट राइटर

मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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