भोपाल पुलिस का यह कैसा चेहरा… चोरी ऊपर से सीना जोरी

भोपाल पुलिस का यह कैसा चेहरा… चोरी ऊपर से सीना जोरी

भोपाल।

देश भर में कोरोना महामारी का दौर जारी है मध्यप्रदेश में भी कोरोना के लगातार आंकड़े बढ़ रहे है कोरोना काल में देशभक्ति जनसेवा का नारा देने वाली मध्यप्रदेश पुलिस के प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में कई प्रकार के चेहरे दिखाई दे रहे हैं। कोरोना के शुरुआती दौर में जहा कई पुलिस वालों ने कोरोनावायरस से बचाव के लिए अपने द्वारा गाए हुए गीतों के माध्यम से लोगों से कोरोना से बचाव और सुरक्षित रहने की अपील और निवेदन किया जिससे लोग जागरूक हो सकें तो कहीं देश भक्ति जनसेवा का नारा देने वाली पुलिस हकीकत में उस नारे को पूरा करती दिखाई दी जहां सड़कों पर गरीब मजदूरों और नंगे पैर चल रहे उनके मासूम बच्चों के लिए पुलिस उन लाचार मजदूरों के बच्चों के लिए जूते चप्पल की दुकान खोल देती है ताकि बेचारे मजदूरों के बच्चों को पैदल चलने से रास्ते में कोई तकलीफ ना हो।

इसी दौरान मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स थाना इलाके से पुलिस का एक ऐसा चेहरा सामने आया जो पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल तो उठाता ही है इन पुलिस वालों की वजह से कभी कभी अच्छे पुलिस वाले भी बदनाम होते हैं और हमे सोचने पर मजबूर करते है कि पुलिस के ये अलग-अलग चेहरे भी कभी कभी सामने दिखाई देते हैं।
दरअसल सोमवार रात भोपाल के कटारा हिल्स थाना क्षेत्र के हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के बाग मुगलिया एक्सटेंशन लहरपुर इलाके में एक पुलिस की कार रास्ते से गुजरती है उसी दौरान कोई पुलिसकर्मी रुक कर वहां सड़क किनारे एक घर के सामने बाथरूम करने लगता है घर के सामने पुलिस वाले को बाथरूम करता देख एक महिला बोलती हैं कि आप यहा बाथरूम क्यों कर रहे हो फिर क्या वह पुलिसकर्मी इसी बात को लेकर नाराज हो जाता है और उस महिला सहित परिजनों पर घर की बाउंड्री के बाहर से ही डंडे से हमला करने लगता है इस घटना का जब परिवार के अन्य सदस्य वीडियो बनाना शुरू करते हैं तो उस पुलिसकर्मी के साथ अन्य सिविल ड्रेस में पुलिस वाले घर के अंदर जाकर परिवार के सभी लोगों को गाली गलौज करके मारने पीटने लगते हैं इस घटना में परिवार के एक युवक के सर में चोट भी लगी है पुलिस यहां अपनी गलती छिपाने के चक्कर में पुलिस की मारपीट से सर में चोट लगी युवक पर थी उल्टा झूठा मामला दर्ज कर देती है युवक का कहना है कि पुलिस ने मुझे थाने ले जाकर झूठी रिपोर्ट लिखी कि मैं वाहर थूक रहा था और मुझसे उस रिपोर्ट पर साइन भी करवा लिए इस दौरान परिवार की महिला ने बताया कि जिन पुलिसकर्मी ने मारपीट की वह शराब के नशे में थे वही आपको बता दें इस पूरे मामले को लेकर एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ ने जब एडिशनल एसपी संजय साहू से बात की तो उनका कहना है कि आपके द्वारा मुझे जानकारी मिली है मैं इस पूरे मामले को दिखवाता हूं अब देखना यह होगा कि इस पूरे मामले पर कोई कार्यवाही होती है कि नहीं या अपने विभागीय मामले को लेकर पुलिस लीपापोती कर देगी।सूत्रों की मानें तो इस इलाके में कई उद्योगपति और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी रहते हैं।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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