भोपाल में ओला और रैपिडो जैसी बाइक टैक्सी सेवाओं पर सख्ती के संकेत मिले हैं। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्राइवेट नंबर वाले वाहनों का व्यावसायिक इस्तेमाल नियमों के खिलाफ है। शहर में अभी बड़ी संख्या में बाइक टैक्सी चल रही हैं, जबकि कमर्शियल पंजीकरण वाली बाइक की संख्या काफी कम बताई जा रही है।
दरअसल भोपाल आरटीओ जितेंद्र शर्मा ने कहा है कि एग्रीगेटर कंपनियों को नियमों के तहत केवल कमर्शियल वाहनों का ही संचालन करना होगा। यदि कोई गैर-कमर्शियल बाइक या कार यात्रियों को किराए पर ले जाती हुई पाई जाती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। परिवहन विभाग का कहना है कि निजी नंबर वाले वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर निगरानी रखी जाएगी।
भोपाल में बाइक टैक्सी पर सख्ती की वजह क्या है?
बता दें कि यह मुद्दा हाल ही में टैक्सी यूनियनों की हड़ताल के दौरान प्रमुखता से सामने आया था। 18 और 19 अगस्त को हुए प्रदर्शन में यूनियनों ने आरोप लगाया कि ओला, उबर और रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में निजी नंबर वाले दोपहिया और चारपहिया वाहन सवारी ढो रहे हैं। यूनियन का कहना है कि कमर्शियल टैक्सी चालकों को परमिट, फिटनेस, बीमा, टैक्स और दूसरे नियमों का पालन करना पड़ता है, जबकि निजी वाहन उसी तरह व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
वहीं आरटीओ ने भी स्पष्ट किया है कि नियमों के अनुसार केवल कमर्शियल पंजीकरण वाले वाहन ही यात्री परिवहन कर सकते हैं। विभाग के मुताबिक कार्रवाई का उद्देश्य नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। फिलहाल कमर्शियल नंबर वाली बाइक टैक्सी सेवाएं जारी रह सकती हैं, लेकिन निजी नंबर वाले वाहनों का व्यावसायिक संचालन नियमों के दायरे में जांचा जाएगा।
निजी वाहनों पर नजर
परिवहन विभाग के अनुसार भोपाल में कमर्शियल पंजीकरण वाली बाइक की संख्या करीब 200 से 300 के बीच है। इसके मुकाबले टैक्सी यूनियनों का दावा है कि शहर में 10 हजार से ज्यादा बाइक एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म के जरिए बाइक टैक्सी के रूप में इस्तेमाल हो रही हैं। हालांकि इनकी वास्तविक संख्या का आधिकारिक आंकड़ा विभाग ने जारी नहीं किया है।






