उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध मंगलनाथ मंदिर में भगवान को 20 किलोग्राम चांदी से निर्मित नई जलधारी अर्पित की गई। उज्जैन को मंगल की जन्मस्थली के रूप में पहचाना जाता है। यही वजह है कि यहां मंगलनाथ का पौराणिक मंदिर मौजूद है, जो अब भव्य आकार ले चुका है।
मंदिर परिसर में शिवलिंग के आसपास जो जलाधारी मौजूद थी, वह पुरानी हो गई थी। उसमें कई छोटे-छोटे छेद हो गए थे। पूजा के दौरान अक्सर पुजारी, यजमानों और श्रद्धालुओं को इस वजह से हाथों में लग जाती थी। ऐसे में अब नई जलधारी से यह समस्या भी हाल हो गई है और भगवान मंगलनाथ का स्वरूप भी सुंदर दिखाई दे रहा है।
बदली गई मंगलनाथ की जलाधारी
शुक्रवार को भगवान को 20 किलोग्राम चांदी से निर्मित नई जलाधारी अर्पित की गई है। हैदराबाद के भक्त अमर ओहरी और सोनम ओहरी ने इसे दान किया है। इसकी अनुमानित कीमत 50 लाख रुपए बताई जा रही है। पूरे विधि विधान से पूजा, यज्ञ और अनुष्ठान संपन्न कर इसकी स्थापना की गई। इस दौरान मंदिर लगभग 7 घंटे तक बंद रहा।
उज्जैन, मध्य प्रदेश: श्री मंगलनाथ मंदिर के पुजारी महंत अजय भारती ने कहा, “पूर्व की जलाधारी किसी यजमान ने 15 वर्ष पहले लगाई थी और उस जलाधारी में वर्तमान में बहुत सारे छिद्र हो गए थे, छिद्र हो जाने के कारण भगवान की सेवा में काफी परेशानी होती थी… भगवान की कृपा से एक श्रद्धालु 20… pic.twitter.com/CjHyNgyB9f
— IANS Hindi (@IANSKhabar) August 21, 2026
पूजन हवन के साथ संपन्न हुआ काम
इस बारे में जानकारी देते हुए मंदिर के पुजारी महंत अजय भारती ने बताया कि पूर्व जलाधारी साल 2007 में स्थापित की गई थी। लंबे समय तक हुए उपयोग की वजह से इसमें छोटे-छोटे छेद हो गए थे जिस वजह से असुविधा होती थी। इसी को देखते हुए नई जलधारी स्थापित करने की आवश्यकता महसूस हो रही थी। ऐसे में भगवान की प्रेरणा से हैदराबाद के यजमान अमन ओहरी और सोनम ओहरी ने 20 किलोग्राम चांदी दान कर जलाधारी तैयार करने का संकल्प लिया।
यजमान के अनुरूप जलाधारी का नाप लेकर लगभग 20 किलोग्राम चांदी से नई जलाधारी तैयार की गई। इसकी स्थापना से पहले विद्वान आचार्य ने पूजन हवन और यज्ञ किया। निर्धारित मुहूर्त में इस प्रक्रिया को शुरू कर पुरानी जलाधारी हटाकर नई स्थापित की गई। इस दौरान 7 घंटे तक गर्भगृह के कपाट बंद रहे और श्रद्धालुओं का प्रवेश भी प्रतिबंधित रहा।
निखरा मंगलनाथ का स्वरूप
अजय भारती के मुताबिक मंदिर में नई जलाधारी स्थापित होने के बाद भगवान मंगलनाथ का स्वरूप निखर गया है। पहले की तुलना में स्वरूप अधिक स्पष्ट और पूर्ण दिखाई दे रहा है। पुरानी जलाधारी के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा था।






