
Candidates protest : शिक्षक भर्ती 2018 के प्रथम चरण में शेष रह गए पदों को वृद्धि के साथ पूर्ण करने के लिए सीएम हाउस का घेराव करने पहुचे अभ्यर्थियों को पुलिसकर्मियों ने पाॅलिटेक्निक चौराहें पर रोक लिया। इसके बाद अभ्यर्थियों ने भोपाल की सड़कों पर पाॅलीटेक्निक चौराहे से वल्लभ भवन होते हुए रैली निकाली और लोक शिक्षण संचालनालय का घेराव किया। बता दें कि इसके लिए उच्च माध्यमिक, माध्यमिक व प्राथमिक शिक्षकों के सभी वर्गों के अभ्यर्थी प्रदेशभर से इकट्ठा हुए है।
गौरतलब है कि 8 मई से लगातार चयनित शिक्षक जिनमें भारी संख्या में महिला अभ्यर्थी भी हैं..ने डीपीआई के सामने सड़कों पर डेरा डाला हुआ है। ये रात-दिन धरने पर बैठी है, तपती गर्मी और लू के थपेड़े भी उनके हौसलों को कमजोर करने में असफल रहे हैं। 42 डिग्री के तापमान पर महिला अभ्यर्थी भिंड, मुरैना, ग्वालियर, उज्जैन, बालाघाट, टीकमगढ़, गंजबासौदा सहित प्रदेशभर से आई महिला अभ्यर्थी डीपीआई के बाहर धरना देने को मजबूर है।
इनका नेतृत्व कर रही रचना व्यास और रक्षा जैन ने कहा कि चाहे जो भी मजबूरी हो ,विभाग और सरकार को प्रथम काउंसलिंग के रिक्त पद, द्वितीय काउंसलिंग के रिक्त पद, प्रवर्ग परिवर्तन के पद, विभाग परिवर्तन के पद तथा और भी जो रिक्त पद शेष रह गए हैं, जो पहले से ही वित्त विभाग से मंजूर है, पर नियुक्ति देनी होगी। अभी तक विभाग पुराने पदों को लेकर एक ही बात कह रहा है कि वह विलोपित कर दिए गए हैं वहीं ईडब्ल्यूएस संघ के अध्यक्ष धीरज तिवारी ने ईडब्ल्यूएस के पदों के साथ अन्य सभी वर्गों के पदों की पूर्ति की मांग की लेकिन विभाग द्वारा इस पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस संबंध में अब तक दर्जनों जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, प्रमुख सचिव ,लोक शिक्षण आयुक्त सभी को पत्र लिखे लेकिन कोई निराकरण नहीं हुआ है।
हाल ये है कि अब अभ्यर्थी सड़कों पर आ गए हैंं। इनका कहना है कि एक और सरकार लाखों पदों की पूर्ति का लक्ष्य तय करती है। मुख्यमंत्री मंचों से घोषणाएं करते हैं लेकिन मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा अमल नहीं किया जाता है। मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग की यह खामियां सरकार के लिए फजीहत बनी हुई है। प्रथम चरण में उच्च माध्यमिक शिक्षकों के 5935 पद व माध्यमिक शिक्षकों के 2233 पद रिक्त हैं जिन्हें द्वतीय चरण में पूरा किया जाना था। इनका कहना है कि मध्यप्रदेश में लगभग 11 साल के बाद आई शिक्षक भर्ती में हजारों विसंगतियां हैं। इतने सालों के बाद जो पद आए वो भी बहुत नाम मात्र के थे थे जिसकी वजह से पात्र उच्च माध्यमिक, माध्यमिक तथा प्राथमिक शिक्षकों के साथ न्याय नहीं हो सका और इस कारण सभी वर्ग के अभ्यर्थियों में रोष है।
पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

