भोपाल के ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ महीनों से मंदिरों में लगातार चोरी की घटनाएं सामने आ रही थीं। इन वारदातों से स्थानीय लोगों में नाराजगी और चिंता दोनों बढ़ रही थी।
कई मंदिरों से चांदी के मुकुट, छत्र और दूसरी धार्मिक वस्तुएं गायब होने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया। लगातार जांच और तकनीकी निगरानी के बाद आखिरकार पुलिस ने पूरे गिरोह तक पहुंचकर बड़ी कार्रवाई की।
विशेष जांच टीम (एसआईटी) बनाई
पुलिस के मुताबिक बैरसिया, ईंटखेड़ी और सूखी सेवनिया थाना क्षेत्र में हुई चोरी की घटनाओं की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) बनाई गई थी। टीम ने सीसीटीवी फुटेज, पुराने अपराधियों के रिकॉर्ड और तकनीकी इनपुट के आधार पर कई दिनों तक जांच की।
इसी दौरान मुखबिर से मिली जानकारी के बाद सूखी सेवनिया बायपास के पास घेराबंदी कर गिरोह के सरगना दीनदयाल उर्फ दीना महाराज समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने कई वारदातों में अपनी भूमिका स्वीकार की है।
भोपाल मंदिर चोरी गिरोह कैसे करता था वारदात?
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह पहले उन मंदिरों को निशाना बनाता था जहां सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होती थी। आरोपी वारदात से पहले मंदिर की रेकी करते थे और यह देखते थे कि रात में वहां कितनी आवाजाही रहती है। कार्रवाई से बचने के लिए सभी आरोपी घटना से करीब पांच से छह घंटे पहले अपने मोबाइल फोन बंद कर देते थे ताकि उनकी लोकेशन ट्रैक न हो सके।
देर रात आरोपी मंदिरों के ताले, दरवाजे या खिड़कियों की ग्रिल तोड़कर अंदर घुसते और चांदी के मुकुट, छत्र, पूजा की थाली, चांदी जड़ित धार्मिक सामान और दूसरी कीमती वस्तुएं लेकर फरार हो जाते थे। जांच में यह भी सामने आया कि चोरी का सामान सीधे बाजार में बेचने के बजाय एक तय व्यक्ति के जरिए ठिकाने लगाया जाता था।






