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भोपाल गेहूं खरीदी विवाद: लिस्ट से हटे वेयरहाउस को फिर केंद्र बनाने पर उमंग सिंघार ने उठाए सवाल, भ्रष्टाचार के आरोप

Written by:Shruty Kushwaha
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कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि आखिर किसके दबाव में उसी परिसर को दोबारा खरीदी केंद्र बनाया गया है। उन्होंने पूछा कि क्या भाजपा सरकार में घोटालेबाजों को बचाना और भ्रष्टाचार ही सरकारी व्यवस्था का हिस्सा बन चुका है।
भोपाल गेहूं खरीदी विवाद: लिस्ट से हटे वेयरहाउस को फिर केंद्र बनाने पर उमंग सिंघार ने उठाए सवाल, भ्रष्टाचार के आरोप

Umang Singhar

भोपाल में 500 टन गेहूं खरीदी से जुड़े अनियमितताओं के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि जिस वेयरहाउस को गड़बड़ी के चलते खरीदी सूची से हटा दिया गया था, उसी परिसर में फिर से खरीदी केंद्र बना दिया जाना “भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार मॉडल” को उजागर करता है।

कांग्रेस नेता ने सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा विधायक विष्णु खत्री के वेयरहाउस-1 में 500 टन गेहूं खरीदी से जुड़ी अनियमितताएं पकड़ी गई थीं, जिसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई के नाम पर उसे सूची से बाहर कर दिया था। लेकिन अब उसी परिसर के दूसरे वेयरहाउस को खरीदी केंद्र घोषित किए जाने पर उन्होंने गंभीर आपत्ति जताई है।

उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा

उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि यह निर्णय संदेह पैदा करता है और इससे यह सवाल उठता है कि “आखिर किसके दबाव में उसी परिसर को दोबारा खरीदी केंद्र बनाया गया।” उन्होंने कहा कि “क्या भाजपा सरकार में घोटालेबाजों को बचाना और भ्रष्टाचार ही सरकारी व्यवस्था का हिस्सा बन चुका है।” विपक्ष का आरोप है कि यह पूरा मामला प्रशासनिक निर्णयों की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।

वेयरहाउस को लेकर अनियमितताओं के आरोप

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संबंधित परिसर में पहले वेयरहाउस-1 में अनियमितताओं की शिकायत सामने आने के बाद प्रशासन ने उसे खरीदी केंद्र की सूची से हटा दिया था। इसके बाद अब उसी परिसर के वेयरहाउस-2 को लगभग 5 हजार मीट्रिक टन क्षमता के साथ अस्थायी खरीदी केंद्र के रूप में शामिल किया गया है। प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में वैकल्पिक स्थान की कमी के कारण यह निर्णय लिया गया है, ताकि किसानों को दूर जाकर उपज बेचने में कठिनाई न हो। अधिकारियों के मुताबिक..चयनित वेयरहाउस को पहले खाली कराया गया और सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के बाद उसे खरीदी केंद्र के रूप में मंजूरी दी गई। यह भी बताया जा रहा है कि इस वेयरहाउस को खरीदी केंद्र बनाने को लेकर पहले अनुमति नहीं मिली थी, लेकिन बाद में प्रशासनिक स्तर पर इसे सूची में शामिल कर लिया गया। अब इस फैसले के बाद वेयरहाउस संचालन से जुड़े आर्थिक लाभ और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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