पालघर मॉब लिंचिंग मामले को सांप्रदायिक रंग देना चाहती है भाजपा: बावरिया

पालघर मॉब लिंचिंग मामले को सांप्रदायिक रंग देना चाहती है भाजपा: बावरिया

भोपाल| कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव मध्यप्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने पालघर मॉब लिंचिंग मामले में भाजपा पर हमला बोला है| उन्होंने जारी बयान में कहा साधुओं की माॅब लिंचिंग के दौरान हुई हत्या बहुत ही दुर्भाग्य पूर्ण थी। उसकी कितनी भी निंदा की जाए कम है। महाराष्ट्र के गृह मंत्री ने इस अपराध में शामिल लोगों की सूची भी जारी की है। उससे यह स्पष्ट होता है कि घटना को सांप्रदायिक रंग देना उचित नहीं है, लेकिन दु:ख की बात है कि भाजपा व कुछ अन्य ताकते इस घटना को सांप्रदायिक रंग देना चाहती है। भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा, आनंद पंडित और रिपब्लिक चैनल के एंकर अर्नब गोस्वामी इसमें शामिल है।

उन्होंने कहा रिपब्लिक चैनल के एंकर अर्नब गोस्वामी भाजपा प्रवक्ता की तरह ही अपना चैनल चला रहे है । हाल ही में उनके द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी पर भी अशोभनीय टिप्पणी की गई। भारतीय संस्कृति और लोकतंत्र की मर्यादा के विपरीत क़ानून का उल्लंघन करते हुए जिस भाषा का उपयोग किया वह घोर निंदनीय हे। उन्हें बोलने से पहले यह समझना चाहिए था की जो महिला उनके जन्म के पहले इस देश में आयी। उन्होंने यहाँ शादी की और उन्हें यहाँ आये हुए क़रीब 50 वर्ष हो गए और साथ ही यहाँ की संस्कृति को पूरी तरह से अपनाया हो।ऐसे में उनका गरिमा व सादगी पूर्ण जीवन किसी भारतीय नारी से कम नहीं है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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