कैबिनेट गठन की कवायद तेज, सिंधिया ने की अमित शाह से मुलाकात

कैबिनेट गठन की कवायद तेज, सिंधिया ने की अमित शाह से मुलाकात

भोपाल| प्रदेश में बढ़ते कोरोना संकट के बीच मंत्रिमंडल गठन की कवायद तेज हो गई है| इस बीच भाजपा नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। बताया जा रहा है सिंधिया ने बड़ा मंत्रिमंडल बनाए जाने की बात रखी है। वहीं भाजपा के तमाम बड़े नेता और मंत्री बनने के दावेदार भोपाल में जुटना शुरू हो गए हैं|

सियासी उथल पुथल के बाद चौथी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले शिवराज सिंह चौहान जल्द ही अपने कैबिनेट का गठन करेंगे| कोरोना महामारी के चलते फिलहाल छोटा मंत्रिमंडल बनाने पर विचार किया जा रहा है| इस बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया की अमित शाह से हुई मुलाक़ात के बाद कई अटकलें शुरू हो गई है| बताया जा रहा है कि सिंधिया बड़ा मंत्रिमंडल बनाये जाने के पक्ष में है| सिंधिया खेमे से लगभग 10 नेताओं को मंत्री बनाये जाने की चर्चा है|

कोरोना संकट को देखते हुए भाजपा में मंत्रिमंडल छोटा होने पर विचार चल रहा है| इस संकट के समाप्त होने के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार कर अन्यों को मौका दिया जाएगा| ऐसी स्थिति में सिंधिया खेमे से एक-दो को ही मौका मिल सकता है। लेकिन सिंधिया अपने खेमे से छह पूर्व मंत्रियों तुलसी सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, महेंद्र सिंह सिसोदिया, प्रभुराम चौधरी, इमरती देवी और प्रद्युम्न सिंह तोमर को एक साथ मंत्री बनवाना चाहते हैं, ताकि वे क्षेत्र में चुनाव के लिए जा सकें। इसके अलावा ऐंदल सिंह कंसाना, राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव और बिसाहू लाल सिंह को भी मंत्री बनाने की चर्चा है|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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