
Digvijaya Singh on Chidambaram Statement
पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम के उस बयान ने सियासी हलचल मचा दी है जिसमें उन्होंने मुंबई में हुए आतंकी हमलों को लेकर कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय दबाव में सरकार ने जवाबी कार्रवाई न करने का फैसला लिया था। इसे लेकर बीजेपी अब कांग्रेस पर हमलावर है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से जब इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वे तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार के मंत्रिमंडल में ही नहीं थे तो इसका जवाब किस तरह देंगे।
वहीं, जब उसने इंदौर में उनका विरोध किए जाने पर प्रश्न किया गया तो उन्होंने कहा कि वे संविधान की लड़ाई लड़ते आए हैं और आखिरी सांस तक लड़ते रहेंगे। इंदौर में उनके खिलाफ लगे पोस्टर्स पर किए सवाल पर उन्होंने कहा कि वे सच बोलने से कभी नहीं हिचकें हैं और आगे भी सच के साथ खड़े रहेंगे।
मुंबई हमलों को लेकर पूर्व गृहमंत्री के बयान पर बवाल
26/11 मुंबई आतंकी हमलों के इतने साल बीतने के बावजूद उस घटना के पीछे के फैसलों पर बहस आज भी थमने का नाम नहीं ले रही। अब पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने एक इंटरव्यू में में चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि तत्कालीन यूपीए सरकार ने पाकिस्तान पर सैन्य जवाबी कार्रवाई न करने का फैसला अंतरराष्ट्रीय दबाव में..खासकर अमेरिका के हस्तक्षेप के कारण लिया था। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलचल मचा दी है और भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए इसे “बहुत देर से किया गया कबूलनामा” करार दिया है।
दिग्विजय सिंह ने कहा “आखिरी सांस तक लड़ेंगे संविधान की लड़ाई”
इस मामले पर जब दिग्विजय सिंह से पत्रकारों ने सवाल किया तो उन्होंने कहा कि “आप ये प्रश्न उससे पूछ रहे हैं जो डॉ. मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल का सदस्य नहीं था। ये सवाल उससे पूछो जो सदस्य था।” वहीं जब उनसे इंदौर में हुए उनके विरोध पर प्रश्न किया तो उन्होंने कहा कि “दिग्विजय सिंह संविधान की लड़ाई लड़ता है, लड़ेगा और आखिरी सांस तक लड़ेगा।”
इंदौर में हुआ दिग्विजय सिंह का विरोध
बता दें कि दिग्विजय सिंह ने इंदौर में बीजेपी विधायक मालिनी गौड़ के बेटे एकलव्य गौड़ के द्वारा सीतलामाता बाज़ार से मुस्लिम कर्मचारियों को हटाने के फरमान का विरोध किया था। उसी दौरान इंदौर जिला कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने बिना उनका नाम लिए कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि किसी भी नेता को अगर किसी विषय पर कोई स्टैंड लेना हो तो पहले संगठन की सहमति लेना जरूरी है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर किसी को कुछ कहना है तो पहले शहर या जिला अध्यक्ष से बात कर लेनी चाहिए। इसके बाद एक बार फिर कांग्रेस में अंदरूनी विवाद को लेकर चर्चाएं शुरु हो गई हैं लेकिन दिग्विजय सिंह ने साफ कर दिया है कि वे संविधान के लिए अपनी लड़ाई अंतिम सांस तक जारी रखेंगे।
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पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

