प्रदेश की आंगनवाड़ियों में अब बच्चे खेलेंगे खिलौनों से

प्रदेश की आंगनवाड़ियों में अब बच्चे खेलेंगे खिलौनों से

भोपाल। प्रदेश की आंगनवाड़ियों मे अब बच्चे ना केवल पौष्टिक आहार पाएंगे बल्कि अच्छे खिलौने से भी खेलेंगे। जिसके लिए मध्यप्रदेश की सभी आंगनवाड़ियों में खिलौना बैंक खोला जाएगा ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा और घर जैसा माहौल मिल सकें। दरअसल आंगनवाड़ियों में अक्सर देखा गया है कि बच्चों के लिए खेलने की उचित व्यवस्था नही होती है, ना ही खेलने के लिए खिलौने होते हैं जिस कारण बच्चे खेल नहीं पाते। इसी बात को समझते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने तय किया है कि प्रदेश की हर आंगनवाड़ी में अब खिलौना बैंक होगा। इमरती देवी ने इसे लेकर कहा है कि आंगनवाड़ी केन्द्रों में आने वाले बच्चों के लिए पुस्तकें और खिलौनो के लिए खिलौना बैंक बनाए जाएंगे। इन बैंकों में कोई भी बच्चों के लिए किताबें और खिलौने दे सकता है।

बाल शिक्षा केंद्र में होगा नौनिहालों का पूर्ण विकास
मध्यप्रदेश में बाल शिक्षा केंद्र में बनी आंगनवाड़ियों में बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए काफी प्रयास किए जा रहे हैं। यहां बच्चे इनडोर और आउटडोर गेम्स खेल सकें इसके लिए पूरी व्यवस्था की गई है। इस तरह के सभी केंद्र को प्ले स्कूल का रूप दिया गया है ताकि बच्चों का यहां मन लग सकें। यहां बच्चों के लिए दीवारों पर अच्छी पेंटिंग्स बनाई गई हैं साथ ही दीवारों पर वर्णमाला के अक्षर,  अंग्रेजी वर्णमाला के लेटर्स के साथ कार्टून कैरेक्टर, पक्षी, फल, सब्जी, जानवरों के नाम सहित बहुत सी अन्य चीजें बनाई हुई हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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