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सीएम डॉ मोहन यादव की अपील पर उमंग सिंघार का पलटवार, कहा- सिर्फ गर्मी नहीं, पानी और जीवन का भी बड़ा संकट है

Written by:Atul Saxena
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उमंग सिंघार ने कहा आदिवासी क्षेत्रों, बुंदेलखंड और महाकौशल से भयावह तस्वीरें सामने आ रही हैं। महिलाएं और बच्चे कई किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं।
सीएम डॉ मोहन यादव की अपील पर उमंग सिंघार का पलटवार, कहा- सिर्फ गर्मी नहीं, पानी और जीवन का भी बड़ा संकट है

Leader of the Opposition Umang Singhar

मध्य प्रदेश में भीषण गर्मिम पड़ रही है, अधिकांश जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक चल रहा है ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से गर्मी से बचाव करने की एडवाइजरी जारी की है वहीं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रदेश की जनता से अपील की है कि वे इस दौरान अधिक पानी पिएं और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें, सीएम की अपील के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पलटवार किया है

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बढ़ती गर्मी को देखते हुए 29 मई को प्रदेशवासियों के लिए एक अपील जारी की है , सीएम ने कहा कि वे बढ़ते हुए तापमान और अधिक गर्मी से होने वाली कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए अपने स्वास्थ्य के प्रति सावधानी बरतें और बचाव के आवश्यक उपाय अपनाएं। डॉ मोहन यादव ने कहा पर्याप्त पानी पिएं, बच्चों को हाइड्रेटेड रखें और बाहर निकलते समय पानी की बोतल अवश्य साथ रखें।

महिलाएं और बच्चे कई किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर

मुख्यमंत्री की इस अपील पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पलटवार किया है, उन्होंने X पर लिखा- मध्यप्रदेश में आज सबसे बड़ा संकट सिर्फ गर्मी का नहीं, बल्कि पानी और जीवन का संकट है। आदिवासी क्षेत्रों, बुंदेलखंड और महाकौशल से भयावह तस्वीरें सामने आ रही हैं। महिलाएं और बच्चे कई किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं, जबकि कई जगह मासूम अपनी जान जोखिम में डालकर गड्ढों से पानी निकाल रहे हैं।

नल जल योजना पर उठाये सवाल 

प्रदेश सरकार को घेरते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा-  सरकार ने वर्ष 2024 -26 में “जल जीवन मिशन” के लिए लगभग 25 हजार करोड़ रुपये और “ग्रामीण जल नल योजना” के लिए 490 करोड़ रुपये के प्रावधान का दावा किया था। लेकिन जमीन पर जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है। प्रदेश पर 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है, फिर भी लोगों को पीने का पानी नहीं मिल रहा। मुख्यमंत्री जी, जनता को विज्ञापन नहीं, पानी चाहिए। जनता को भाषण नहीं, जीने का अधिकार चाहिए।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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