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MP में गहराया जलसंकट: उमंग सिंघार ने बीजेपी को घेरा, कहा “डबल इंजन सरकार में मध्यप्रदेश प्यास से तड़प रहा है”

Written by:Shruty Kushwaha
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उन्होंने कहा कि आदिवासी बहुल इलाकों में महिलाएं कई-कई किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं, जबकि बच्चे जान जोखिम में डालकर गड्ढों और असुरक्षित स्रोतों से पानी निकाल रहे हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोग मजबूरी में गंदा पानी पी रहे हैं जिससे स्वास्थ्य संकट भी गहराने की आशंका भी है।

इस भीषण गर्मी में मध्यप्रदेश के कई हिस्से जलसंकट से जूझ रहे हैं। इसे लेकर कांग्रेस लगातार सरकार पर सवाल उठा रही है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य की जल व्यवस्था को लेकर बीजेपी सरकार पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि “डबल इंजन सरकार” के दावों के बावजूद प्रदेश में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है और कई इलाकों में हालात चिंताजनक हैं।

मध्यप्रदेश भारत के उन राज्यों में शामिल है जहां गर्मी के मौसम में जल संकट हर वर्ष गंभीर रूप ले लेता है। विशेष रूप से बुंदेलखंड, मालवा, विंध्य और आदिवासी बहुल जिलों में भूजल स्तर लगातार गिर जाता है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मियों के दौरान हैंडपंप और कुएँ सूखने की शिकायतें आम रहती हैं।

मध्यप्रदेश में जलसंकट

राज्य के कई हिस्सों में जल आपूर्ति का मुख्य आधार भूजल और नलकूप हैं, लेकिन अनियमित वर्षा और बढ़ते तापमान के कारण भूजल पुनर्भरण प्रभावित हुआ है। प्रदेश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में पानी का घनघोर संकट है। सरकारी स्तर पर चल रही “जल जीवन मिशन” जैसी योजनाओं का उद्देश्य हर घर तक नल से जल पहुंचाना है, लेकिन कई ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी नियमित और पर्याप्त जल आपूर्ति की चुनौतियाँ बनी हुई हैं। खासकर दूरस्थ आदिवासी बस्तियों में पानी की पहुंच आज भी एक बड़ी समस्या मानी जाती है।

उमंग सिंघार ने लगाए आरोप 

उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि आदिवासी इलाकों में महिलाएं कई-कई किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं, जबकि बच्चे असुरक्षित स्रोतों से पानी निकालकर जान जोखिम में डाल रहे हैं। कई परिवार गंदा पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे स्वास्थ्य संकट का खतरा भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मौसम विभाग की चेतावनियों के बावजूद सरकार की तैयारी नाकाफी साबित हुई। कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार कर्ज पर कर्ज ले रही है, लेकिन जल संकट के स्थायी समाधान जमीन पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि “करोड़ों के विज्ञापन हैं, इवेंट मैनेजमेंट हैं लेकिन जनता के हिस्से में प्यास, अव्यवस्था और बदहाली आई है।”

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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