किसानों को लेकर मुख्यमंत्री ने विधानसभा में किया बड़ा खुलासा, मानी गलती

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भोपाल।  मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्य में ओला और पाले के कारण फसलों को क्षति पहुंचने की बात स्वीकारते हुए कहा कि यह बात सच है कि वे स्वयं किसानों के खेत में नहीं पहुंचे, लेकिन उनके मंत्री, विधायक और अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे और उन्हें प्रत्येक बात की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं जानकारी हासिल करने और किसानों के बारे में सोचने में व्यस्त रहे। प्रभावित क्षेत्रों में सर्वेक्षण कराया जा रहा है और उसके बाद नियमों के अनुरूप प्रभावितों को राहत राशि वितरित की जाएगी। इस कार्य में थोड़ा वक्त लगता है।

किसानों की सुध नहीं ले रही सरकार : चौहान

इसके पहले पूर्व मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि वे स्वयं जबलपुर, सीहोर, दमोह, बालाघाट, राजगढ़, शाजापुर और कई अन्य जिलों में होकर प्रभावित किसानों से मिलकर आए हैं। धान, मूंग और उड़द आदि फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीडि़त किसानों की सरकार सुध नहीं ले रही है। इसके अलावा फसल खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्थाएं और अराजकता है। चौहान ने कहा कि राज्य सरकार को धान पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ की तरह 2500 रूपए प्रति ङ्क्षक्वटल की दर से खरीदना चाहिए। इसके अलावा हाल में खरीदी केंद्रों पर किसानों से धान खरीदी के जो टोकन दिए गए हैं, उन्हें मान्य कर धान खरीदी हुई मानी जाए। जिन किसानों की धान पानी के कारण सड़ गयी है, उन्हें भी राहत पहुंचाने के लिए सरकार उनकी फसल उसी स्थिति में खरीदे। इसके पहले चौहान ने दावा करते हुए कहा कि दो माह से अधिक समय पहले जब उन्होंने सत्ता छोड़ी थी, उस समय राज्य की वित्तीय स्थिति ठीक थी। राज्य में वे राजस्व सरप्लस की स्थिति छोडक़र गए हैं। वहीं कमलनाथ ने कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं थी।

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