कांग्रेस ने EOW पर लगाया भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने का आरोप, केके मिश्रा ने की जांच की मांग

कांग्रेस नेता ने कहा कि मध्यप्रदेश की आर्थिक अपराध शाखा भ्रष्ट अधिकारियों को “धर्माचार्य” और “समाजसेवी” बताकर क्लीनचिट दे रही है। उन्होंने सीएम से मांग की है कि EOW की सभी लंबित और बंद शिकायतों की जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन मामलों में कार्रवाई हुई और किन्हें बचाया गया।
KK Mishra

EOW Corruption Allegations KK Mishra

कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ जांच करने वाली एजेंसी EOW की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सवाल किया कि भ्रष्टाचारियों को “धर्माचार्य और समाजसेवक”का प्रमाण पत्र देने जैसी छूट EOW को किसने दी और उन्हें संरक्षित करने के पीछे कौन-सा संरक्षण मौजूद है।

उन्होंने कहा कि पर्दे के आगे और पीछे दोनों ही तरफ़ चल रहे इन खेलों के नैपेथ्य में कौन सा खेल चल रहा है, खिलाड़ियों के किरदार कौन हैं, किसके संरक्षण में सांप-सीढ़ी का खेल खेला जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि EOW के समक्ष आई सभी प्रामाणिक शिकायतों, भेजे गए नोटिस, दर्ज FIR और बाद में बंद किए गए प्रकरणों की जांच कर वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाए।

केके मिश्रा ने EOW की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल 

कांग्रेस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच करने वाली आर्थिक अपराध विंग पर सवाल उठाए हैं। केके मिश्रा ने कहा कि  EOW भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने और उन्हें “धर्माचार्य व समाजसेवी” का प्रमाण पत्र दे रही है। उन्होंने कहा कि “मप्र में भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को कानून से शासित करने वाली जांच एजेंसी EOW में आखिर चल क्या रहा है? भ्रष्टाचारियों को ‘धर्माचार्य और समाजसेवियों का प्रमाण पत्र’ जारी करने का अधिकार इसे किसने दिया? इन्हें संरक्षित करने का ‘अदम्य साहस’ कहां से आ रहा है और इन साहसियों को किसका संरक्षण प्राप्त है?”

सीएम से की ये मांग 

उन्होंने कहा कि सौरभ शर्मा के खिलाफ प्राप्त शिकायत को EOW ने क्लिनचिट देकर उसे समाजसेवी बता दिया था। इसी तरह PWD के ही एक अन्य विवादास्पद ENC को भी इसी तरह उपकृत किया गया। आर्थिक अनियमितताओं के जद में आये एक विवादास्पद फाउंडेशन के विरुद्ध दर्ज एफआईआर को भी पहले ख़ारिज कर दिया गया, बाद में दबाव के बाद उसे फिर दर्ज किया गया। केके मिश्रा ने सीएम मोहन यादव से मांग की है कि इओडब्ल्यू के पास बड़े भ्रष्टाचार की कितनी शिकायतें आईं, कितनों को व्हाट्सएप पर नोटिस भेजे गए, जांच के बाद कितनी एफआईआर दर्ज हुईं और कितने मामलों में खात्मा लगाया गया इसका पता लगाया जाए। उन्होंने कहा है कि इस मामले में लिप्त सभी लोगों के नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
Follow Us :GoogleNews