महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा ने भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेस की। इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार पर महिला आरक्षण के नाम पर “असंवैधानिक और सत्ता-केंद्रित राजनीति” करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार परिसीमन के बहाने सत्ता पर एकाधिकार स्थापित करने की कोशिश कर रही थी, जिसे विपक्ष की एकजुटता ने विफल कर दिया।
कांग्रेस नेत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण की पुरजोर समर्थक रही है। उन्होंने याद दिलाया कि सितंबर 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम का भी कांग्रेस ने समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि यहां कांग्रेस यह स्पष्ट कर देना चाहती है कि कांग्रेस के साथ ही समूचा विपक्ष महिला आरक्षण के पक्ष में 100 प्रतिशत एकजुट है।
शोभा ओझा ने की महिला आरक्षण लागू करने की मांग
शोभा ओझा ने मांग की है कि केंद्र सरकार बिना किसी देरी के 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना के मुद्दों में उलझा दिया है ताकि राजनीतिक लाभ लिया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा महिलाओं को अधिकार देना नहीं, बल्कि चुनावी गणित को अपने पक्ष में साधना है। कांग्रेस नेता ने पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि मणिपुर, उन्नाव, हाथरस और महिला पहलवानों से जुड़े यौन शोषण जैसे गंभीर मामलों में लंबे समय तक मौन रहने वाले प्रधानमंत्री अचानक महिला हितैषी की भूमिका कैसे निभाने लगे, यह जनता के लिए सवाल है।
महिला सशक्तिकरण के लिए कांग्रेस की नीतियों का उल्लेख किया
कांग्रेस के इतिहास का उल्लेख करते हुए शोभा ओझा ने कहा कि महिला सशक्तिकरण पार्टी की मूल नीति का हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में पंचायतों में 33 प्रतिशत आरक्षण की पहल हुई थी, जबकि पीवी नरसिम्हा राव सरकार के दौरान 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के माध्यम से पंचायतों और नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया गया। वर्ष 2010 में यूपीए सरकार ने राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक भी पारित कराया था। उन्होंने कहा कि आज देश में जो लाखों महिला प्रतिनिधि सक्रिय हैं, वह कांग्रेस की नीतियों का ही परिणाम हैं।
बीजेपी पर निशाना
भाजपा की विचारधारा पर निशाना साधते हुए शोभा ओझा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक एमएस गोलवलकर के विचारों का उल्लेख किया और आरोप लगाया कि महिलाओं की भूमिका को सीमित करने वाली सोच आज भी भाजपा की राजनीति में झलकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे विचार आधुनिक लोकतंत्र और समानता के सिद्धांतों के खिलाफ हैं। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि मणिपुर हिंसा, उन्नाव, हाथरस, महिला पहलवानों के यौन शोषण और अन्य मामलों में सरकार की चुप्पी इसी मानसिकता का परिणाम है। उन्होंने बृजभूषण शरण सिंह, कुलदीप सेंगर, प्रज्वल रेवन्ना और मध्य प्रदेश के विजय शाह जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि इन मामलों में राजनीतिक संरक्षण दिया गया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों पर सवाल उठाने वालों की जासूसी कराने जैसे मामलों पर भी सरकार मौन रही, जबकि अब वही लोग महिला सुरक्षा की बातें कर रहे हैं, जो विरोधाभासी और चिंताजनक है।
सरकार से की ये मांगें
कांग्रेस की मांगों को दोहराते हुए शोभा ओझा ने कहा है कि महिला आरक्षण को मौजूदा 543 लोकसभा सीटों पर तुरंत लागू किया जाए, ओबीसी महिलाओं के लिए उप-कोटा सुनिश्चित किया जाए, जनगणना और परिसीमन को आरक्षण से अलग रखा जाए तथा महिला सुरक्षा मामलों में स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि महिलाओं के अधिकार, सम्मान और प्रतिनिधित्व की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि जब तक महिलाओं को उनका वाजिब हक नहीं मिलता, कांग्रेस पार्टी हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी।






