मोदी के बयान पर मप्र में छिड़ी बहस, सोशल मीडिया पर भिड़ी भाजपा-कांग्रेस

मोदी के बयान पर मप्र में छिड़ी बहस, सोशल मीडिया पर भिड़ी भाजपा-कांग्रेस

भोपाल| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने शुक्रवार को रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना का लोकार्पण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया। इस दौरान पीएम मोदी ने अपने सम्बोधन में कुछ ऐसी बातें कहीं जिसको लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई| वहीं कांग्रेस ने मोदी के बयान को लपकते हुए इसे झूठा बता दिया| अब इसको लेकर भाजपा (BJP) और कांग्रेस (Congress) में ट्विटर वार शुरू हो गया है|

दरअसल, पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि रीवा की पहचान नर्मदा नदी के नाम से है। जबकि बताया जा रहा है कि नर्मदा नदी और रीवा जिले का कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा रीवा ने वाकई इतिहास रच दिया है। रीवा की पहचान मां नर्मदा के नाम से और सफेद बाघ से रही है। अब इसमें एशिया के सबसे बड़े सोलर पावर प्रोजेक्ट का नाम भी जुड़ गया है।’ कांग्रेस ने ट्वीट कर पीएम मोदी के बयान को झूठा बताया|

कांग्रेस का वार
कांग्रेस ने ट्वीट कर लिखा-‘मोदी के झूठ में हुई बढ़ोतरी, नर्मदा नदी से रीवा की पहचान बताईं..! सच ये है 1- नर्मदा का उद्गम स्थल अमरकंटक है 2- अमरकंटक से जबलपुर की ओर प्रवाहित है 3- नर्मदा रीवा से 388 किलोमीटर दूर है| मोदी जी, धीरे-धीरे सच बोलने की प्रैक्टिस क्यों नहीं करते’|

कांग्रेस को सिर्फ उतना इतिहास पता जितना नेहरू ने लिखा-भाजपा
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा ने पलटवार करते हुए कुछ जानकारी शेयर की है| भाजपा ने ट्वीट कर लिखा-ऐसा लगता है कि कांग्रेस को भारत का सिर्फ उतना ही इतिहास पता है, जितना उनके नाना नेहरू “भारत एक खोज” में लिख गये हैं। उनके इस अधूरे ज्ञान को पूरा करने के लिये शासकीय गजेटियर यहां प्रस्तुत है… ताकि उन्हें रीवा, रेवा (नर्मदा) और रेवाखण्ड में संबन्ध समझ आ सके|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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