रोक के बावजूद खुले मंदिर, संस्कृति बचाओ मंच के संयोजक समेत 5 पांच पर FIR

रोक के बावजूद खुले मंदिर, संस्कृति बचाओ मंच के संयोजक समेत 5 पांच पर FIR

भोपाल| Bhopal News देश भर में आठ जून से धार्मिक स्थलों (Religious places) को खोल दिया गया है| वहीं भोपाल में कोई भी धार्मिक स्थल नहीं खोले जाने का प्रशासन द्वारा निर्णय लिया गया था। इस रोक के बावजूद मंदिर खोलने के मामले में संस्कृति बचाओ मंच के संयोजक चंद्रशेखर तिवारी (Chandrasekhar Tiwari) और 5 अन्य लोगों पर FIR दर्ज की गई है

टीटी नगर थाना पुलिस (TT Nagar Police) ने मंदिर खोलने के बाद अनाउंसमेंट करके लोगों को मंदिर के खुलने की जानकारी देना लॉकडाउन का उल्लंघन माना है। संचालक चंद्रशेखर तिवारी सिहत 5 अन्य पर शासकीय आदेशों के उल्लंघन समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

टीटीनगर इलाके में स्थित मां वैष्णो धाम आदर्श नौ दुर्गा मंदिर के संचालक और संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कलेक्टर के फैसले के बाद मंदिरों को खोले जाने का एलान किया था| तिवारी ने कहा था कि सोमवार से भोपाल के लगभग सभी मंदिर (Temple) खुलेंगे, मां वैष्णो धाम आदर्श नो दुर्गा मंदिर पर महामृत्युंजय मंत्र से हवन भी होगा| उन्होंने कहा कलेक्टर अपने आदेश पर पुनर्विचार करें| चंद्रशेखर तिवारी ने सोमवार को रोक के बाद भी मंदिर को न केवल खोला बल्कि अन्य लोगों के साथ मिलकर हवन-पूजन भी किया। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर भक्तों के लिए खोलने की घोषणा माइक से कर दी। इस पर लोग वहां आने लगे। जानकारी मिलते ही टीटीनगर पुलिस ने चंद्रशेखर तिवारी समेत पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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