MP में अब अवैध कॉलोनियों पर लगेगी लगाम! डायवर्जन को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, जानें क्या है नई व्यवस्था और कैसे मिलेगा लाभ

मध्य प्रदेश में भू-माफियाओं और अवैध कॉलोनियों के खिलाफ सरकार अब सख्त रुख अपना रही है। राजधानी भोपाल में जमीन के डायवर्जन से जुड़ी प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जिसका सीधा असर अवैध कॉलोनियों के पनपने पर पड़ेगा। अब जमीन का डायवर्जन भी डिजिटल रजिस्ट्री की तरह ही पंजीकृत होगा, जिससे इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और मनमानी पर लगाम लगेगी। यह कदम उन लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा जो वर्षों से अवैध कॉलोनियों के जाल में फंसकर परेशान होते रहे हैं।
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मध्य प्रदेश का राजस्व विभाग और पंजीयन विभाग मिलकर इस नई व्यवस्था पर तेजी से काम कर रहे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य एसडीएम कार्यालयों से जमीनों का डायवर्जन करवाकर धड़ल्ले से विकसित की जा रही अवैध कॉलोनियों को रोकना है। आपको बता दें कि अभी तक लैंड रिकॉर्ड के पोर्टल पर ऑनलाइन शुल्क जमा करके जमीन के उपयोग बदलने यानी डायवर्जन की प्रक्रिया पूरी की जाती थी। हालांकि इस ऑनलाइन सुविधा से सरकार का राजस्व तो बढ़ा, लेकिन साथ ही मनमाने तरीके से किए गए डायवर्जन के कारण अवैध कॉलोनियों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है। अब रजिस्टर्ड डायवर्जन की व्यवस्था लागू होने से इस मनमानी पर रोक लग सकेगी और व्यवस्थित शहरीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

इस पूरे मामले पर संभागायुक्त संजीव सिंह ने बताया कि शासन स्तर पर डायवर्जन को लेकर गहन समीक्षा की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजीयन और राजस्व विभाग मिलकर इस नई प्रणाली पर काम कर रहे हैं, जिसका लाभ आमजन के साथ-साथ संबंधित जिलों को भी मिलेगा। यह एक ऐसा कदम है जिससे शहरीकरण को व्यवस्थित तरीके से बढ़ावा मिलेगा और आम लोगों को अवैध कॉलोनियों में निवेश करने से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा। यह सरकार की जनता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

नई डिजिटल रजिस्ट्रेशन प्रणाली से कई बड़े फायदे होने वाले हैं। सबसे पहले, कृषि भूमि या अन्य भूमि का उपयोग बदलने की प्रक्रिया थोड़ी कठिन हो जाएगी। इसमें मास्टर प्लान के नियमों, मौजूदा लैंड यूज और डायवर्जन से उत्पन्न होने वाली संवेदनशीलता की स्थिति को स्पष्ट रूप से जाहिर करना अनिवार्य होगा। इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अब केवल डायवर्जन के नाम पर कृषि भूमि पर कॉलोनियां बनाना पूरी तरह बंद हो जाएगा। यह उन लोगों के लिए एक राहत भरी खबर है जो सालों से अवैध कॉलोनियों के मकड़जाल में फंसे हुए थे और उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता था।

वर्तमान स्थिति पर गौर करें तो भोपाल जिले में अवैध कॉलोनियों की संख्या चिंताजनक है। सिर्फ हुजूर तहसील में ही 135 ऐसी अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गई हैं, जो कृषि भूमि का डायवर्जन करके बनाई गई हैं। इन कॉलोनियों में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) के लेआउट और संबंधित नगरीय निकाय की अनुमति का अभाव है। इसके अलावा, जिले के सभी आठ नजूल क्षेत्रों में भी 400 से अधिक अवैध कॉलोनियां मौजूद हैं, जो नियमों को ताक पर रखकर विकसित की गई हैं। सरकार का यह कदम इन सभी अवैध निर्माणों पर लगाम लगाने में सहायक सिद्ध होगा और शहरों का नियोजित विकास सुनिश्चित करेगा।

इतना ही नहीं, राजस्व से जुड़े कामों को और भी सुलभ बनाने के लिए भी सरकार एक महत्वपूर्ण पहल कर रही है। अब लोगों को नामांतरण, सीमांकन और बटांकन जैसे राजस्व संबंधित कामों के लिए नजूल कार्यालयों में अधिकारियों के न मिलने की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। प्रशासन ने तय किया है कि जिले के नजूल कार्यालयों पर ही लोक सेवा गारंटी केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से आमजन अपने राजस्व संबंधी सभी काम आसानी से करवा सकेंगे। यदि उन्हें कोई दिक्कत आती है, तो वे सीधे वहीं मौजूद तहसील के उच्चाधिकारियों से मुलाकात करके अपनी परेशानी का निराकरण करवा पाएंगे। यह व्यवस्था जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाएगी।

प्रशासन का स्पष्ट उद्देश्य है कि नजूल कार्यालयों को आमजन की आवाजाही का केंद्र यानी ‘यूटिलिटी स्पेस’ के तौर पर विकसित किया जाए। आने वाले दो से तीन महीनों में यह नई व्यवस्था पूरी तरह से लागू होने की संभावना है। अभी भोपाल जिले में तीन लोक सेवा गारंटी केंद्र संचालित हैं, जहां आधार अपडेट से लेकर आमजन से जुड़ी 32 विभिन्न सेवाओं के आवेदन करने और प्रमाण पत्र प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध है। इस विस्तार से जनता को राजस्व संबंधी कार्यों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और सरकारी सेवाओं तक उनकी पहुंच और भी आसान हो जाएगी। यह निश्चित तौर पर मध्य प्रदेश की जनता के लिए एक बड़ी राहत और बेहतर प्रशासन की दिशा में उठाया गया एक सराहनीय कदम है।

Pooja Khodani
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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani →
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