मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने 28 अप्रैल 2026 को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में किसानों से जुड़े दो बेहद महत्वपूर्ण मुद्दों का जिक्र किया है। पत्र में उन्होंने बासमती चावल एवं जैविक कपास से जुड़े मुद्दों पर उच्चस्तरीय बैठक की बुलाने की मांग की है। साथ ही केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा APEDA के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया है।
दिग्विजय सिंह ने पत्र में जोर देकर कहा है कि मध्य प्रदेश के कई जिलों के किसान दशकों से उच्च गुणवत्ता वाले सुगंधित बासमती चावल का उत्पादन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक GI (Geographical Indication) टैग नहीं मिला है। जीआई टैग न मिलने के कारण अन्य राज्यों के व्यापारी मध्य प्रदेश में उत्पादित बासमती चावल को अपने राज्य के नाम से निर्यात कर रहे हैं, जिससे राज्य के किसानों को आर्थिक हानि उठानी पड़ रही है।
दिग्विजय सिंह ने पत्र में जैविक कपास क्षेत्र में चल रही गंभीर अनियमितताओं का भी मुद्दा उठाया है। उन्होंने लिखा है कि कुछ व्यापारियों, प्रमाणन एजेंसियों और अधिकारियों की मिलीभगत से साधारण BT कपास को ‘जैविक’ (Organic) बताकर निर्यात किया जा रहा है। यह फर्जीवाड़ा भारत की कृषि निर्यात छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान पहुँचा रहा है।
सिंह ने आगे लिखा है कि इन दोनों मुद्दों को वे पूर्व में राज्यसभा में उठा चुके हैं तथा इस संबंध में प्रधानमंत्री और संबंधित मंत्रियों को भी पत्र लिख चुके हैं, बावजूद इसके अब तक कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई है। सिंह ने पीयूष गोयल से आग्रह किया है कि एक विशेष बैठक बुलाई जाए जिसमें केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, APEDA (कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हों।
प्रस्तावित बैठक में सिंह ने बासमती चावल की जी.आई. टैगिंग तथा जैविक कपास के उत्पादन और निर्यात प्रणाली में सुधार जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा करने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि केंद्र सरकार किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए शीघ्र ही बैठक के लिए समय निर्धारित करेगी, ताकि मध्य प्रदेश के किसानों को न्याय मिल सके और निर्यात प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।







