दिग्विजय सिंह के RSS की तारीफ वाले बयान पर सियासत जारी, कांग्रेस कार्यालय पर लगे पोस्टर ने बढ़ाई हलचल

कांग्रेस महासचिव निधि चतुर्वेदी ने लिखा- " वैचारिक दोगलापन या 'घर वापसी' की छटपटाहट? कांग्रेस की जड़ों में मट्ठा डालने वाले दिग्विजय सिंह पर कब होगी कार्रवाई?
Congress workers Bhopal office poster

Congress workers Bhopal office poster

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा RSS और भाजपा संगठन की तारीफ करते हुए  लालकृष्ण आडवाणी और नरेंद्र मोदी की जो तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी उससे मचा सियासी घमासान अभी तक जारी है। दिल्ली से उठा ये तूफ़ान मध्य प्रदेश में भी जोड़ पकड़े हुए है, पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी की बेटी कांग्रेस महासचिव निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह पर बड़ा हमला किया है जिसके जवाब में कार्यकर्ताओं ने एक बड़ा सा पोस्टर दिग्विजय सिंह के समर्थन में कांग्रेस कार्यालय पर लगाया है जो चर्चा का विषय बना हुआ है।

कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने 27 दिसंबर को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक से पहले एक तस्वीर X पर पोस्ट की थी, इस तस्वीर में लालकृष्ण आडवाणी अन्य कई नेताओं के साथ कुर्सी पर बैठे हैं और उनके पैरों के पास नरेंद्र मोदी बैठे हैं, दिग्विजय सिंह ने लिखा- Quora site पर मुझे यह चित्र मिला। बहुत ही प्रभावशाली है। किस प्रकार RSS का ज़मीनी स्वयं सेवक व जनसंघ, भाजपा का कार्यकर्ता नेताओं की चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री व देश का प्रधानमंत्री बना। यह संघटन की शक्ति है। जय सिया राम।

दिग्विजय सिंह की इस पोस्ट के बाद सियासी तूफ़ान उठ गया, भाजपा ने दिग्विजय सिंह का समर्थन किया और तंज भी कसा उधर कांग्रेस नेताओं के भी अलग अलग बयान सामने आये, सभी ने अपनी अपनी तरह से दिग्विजय सिंह की पोस्ट का मतलब समझाया लेकिन मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी की बेटी कांग्रेस महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने बड़ा हमला किया, उन्होंने दिग्विजय के बयान को लेकर फेसबुक पर बड़ी पोस्ट लिखी उसके बाद मीडिया से बात करते हुए दिग्विजय सिंह पर हमला किया

निधि चतुर्वेदी ने ये लिखा फेसबुक पर 

निधि चतुर्वेदी की पोस्ट का पहला भाग हम यहाँ दे रहे हैं .. उन्होंने लिखा- ” वैचारिक दोगलापन या ‘घर वापसी’ की छटपटाहट? कांग्रेस की जड़ों में मट्ठा डालने वाले दिग्विजय सिंह पर कब होगी कार्रवाई? दिग्विजय सिंह के हालिया बयान ने राहुल गांधी से लेकर उन तमाम ज़मीनी कार्यकर्ताओं के मुँह पर तमाचा मार दिया है, जो आरएसएस और बीजेपी की विचारधारा के खिलाफ सड़क पर लड़ रहे हैं। एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता होने के नाते उनकी यह ज़िम्मेदारी बनती थी कि वे पार्टी के वैचारिक संघर्ष को धार देते, न कि विपक्षी खेमे का गुणगान कर अपने ही कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ते। सुर्खियों में बने रहने की उनकी इस ‘ऊल-जुलूल’ बयानबाज़ी ने आज हर सच्चे कांग्रेसी के आत्म-सम्मान को गहरी ठेस पहुँचाई है। मध्य प्रदेश की राजनीति में ठाकुरवाद, सामंतवाद और गुटबाज़ी को खाद-पानी देकर दिग्विजय सिंह ने हमेशा कांग्रेस को मज़बूत करने के बजाय उसे भीतर से खोखला किया है।”

निधि ने दिग्विजय और मोदी की तस्वीर पोस्ट की 

निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह की पोस्ट के अगले दिन 28 दिसंबर को ये पोस्ट  फेसबुक पर लिखी फिर इसे 29 दिसंबर को X पर पोस्ट कर दिया, उन्होंने इसमें दिग्विजय सिंह की पीएम मोदी के साथ वाली एक तस्वीर भी साझा की है, उनकी इस पोस्ट के बाद सियासी तूफ़ान ने और तेजी पकड़ लिया है, निधि चतुर्वेदी की पोस्ट के बाद दिग्विजय सिंह समर्थक कांग्रेस कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए है और उन्होंने पार्टी नेत्री को इसका जवाब दिया है।

कार्यकर्ताओं ने अपनी पार्टी नेत्री पर किया पलटवार 

दिग्विजय सिंह समर्थक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक पोस्टर भोपाल कांग्रेस कार्यालय पर लगाया है जिसमें लिखा है, “उंगलियां छोटी पड़ गई कि नाखून इतने बढ़ गए, कुछ जुगनुओं (निधि चतुर्वेदी) के काफिले सूरज (दिग्गी राजा) के पीछे पड़ गए। पार्टी कार्यालय पर लगा ये पोस्टर आज मीडिया की सुर्खियाँ बना हुआ है सोशल मीडिया पर भी इस पोस्टर की चर्चा हो रही है। लोगों के बीच चर्चा हो रही है कि कांग्रेस के नेता लाख दावे कर लें पार्टी के अन्दर खेमेबाजी, गुटबाजी और अंतरकलह चल रही है जो इस तरह सामने आती ही रहती है।

दिग्विजय सिंह की इस पोस्ट से उठा सियासी तूफ़ान 

निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह पर किया हमला 

जितेंद्र यादव की रिपोर्ट 

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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