छुट्टी के दिनों में भी जमा कर सकेंगे बिजली बिल, खुले रहेंगे भुगतान केंद्र

छुट्टी के दिनों में भी जमा कर सकेंगे बिजली बिल, खुले रहेंगे भुगतान केंद्र

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| छुट्टी के दिन भी आप बिजली का बिल (Electricity Bill) जमा कर सकेंगे| दशहरा (Dussehra) पर्व समेत अवकाश वाले अन्य चार दिवसों में भी बिजली बिल भुगतान केंद्र खुले रहेंगे। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत 25 अक्टूबर (रविवार), 26 अक्टूबर (दशहरा सार्वजनिक अवकाश), 30 अक्टूबर (मिलाद-उन-नवी) एवं 31 अक्टूबर (महर्षि वाल्मीकी जयंती) को बिल भुगतान केन्द्र सामान्य कार्य दिवसों की तरह कार्य करते रहेंगे।

भोपाल शहर वृत्त के अंतर्गत चारों शहर संभाग यथा पश्चिम, पूर्व, दक्षिण तथा उत्तर संभाग के अंतर्गत सभी जोनल कार्यालय और दानिश नगर, मिसरोद, मण्डीदीप में बिल भुगतान केन्द्र उक्त छुट्टी के दिन भी सामान्य कार्य दिवस की तरह खुले रहेंगे। बिजली उपभोक्ताओं से अपील है कि वे राजधानी के जोनल आफिस में कैश काउंटरों पर बिल भुगतान और भोपाल शहर में विभिन्न स्थानों पर स्थापित ए.टी.पी. मशीन में भी बिल भुगतान कर सकते हैं।

इसके अलावा बिलों के भुगतान की सुविधा एम.पी. ऑनलाइन, कॉमन सर्विस सेन्टर, कंपनी पोर्टल portal.mpcz.in (नेटबैकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, यूपीआई, ईसीएस, बीबीएस, कैश कार्ड एवं वॉलेट आदि) पेटीएम एप एवं उपाय मोबाइल एप के माध्यम से बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है। कंपनी ने यह भी निर्देश दिए हैं कि कंपनी कार्यक्षेत्र के सभी 16 जिलों में बिजली वितरण केन्द्र/बिल भुगतान केन्द्र अवकाश के दिनों में खुले रहेंगे। इसके लिए सभी मैदानी महाप्रबंधकों को निर्देशित किया गया है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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