प्रत्येक पात्र आदिवासी को मिले वनाधिकार पट्टे, लापरवाही बर्दाश्त नहीं: शिवराज

प्रत्येक पात्र आदिवासी को मिले वनाधिकार पट्टे, लापरवाही बर्दाश्त नहीं: शिवराज

भोपाल।

उपचुनाव (BY Election) से पहले प्रदेश की शिवराज सरकार (Shivraj Sarkar) का फोकस आदिवासियों (Tribals) पर बना हुआ है, आदिवासियों को साधने सरकार नए नए फैसले ले रही है। यही कारण है कि गुरुवार वनाधिकार दावों के निराकरण संबंधी बैठक (Meeting on redressal of forest rights claims) में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह (Chief Minister Shivraj) ने साफ कहा कि प्रत्येक पात्र आदिवासी को वनाधिकार पट्टे मिलना चाहिए, इस काम में किसी भी तरह की लापरवाही अथवा विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारी पूरी संवेदना एवं तत्परता के साथ एक-एक दावे का परीक्षण करें तथा प्रत्येक पात्र आदिवासी को वनाधिकार पट्टा दिलवाना सुनिश्चित करें।

दरअसल, गुरुवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आदिम जाति कल्याण विभाग की बैठक (Tribal Welfare Department Meeting) में वनाधिकार दावों के निराकरण की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में वन मंत्री विजय शाह तथा उमरिया से वी.सी द्वारा आदिम जाति कल्याण, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री मीना सिंह समेत कई अधिकारी मौजूद थे।इस दौरान शिवराज ने अधिकारियों और मंत्रियों को दो टूक शब्दों में कहा कि प्रदेश में अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रत्येक व्यक्ति को उनका जायज हक दिलवाने में किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रदेश में पूर्व में बड़ी संख्या में आदिवासियों के वनाधिकार पट्टों के दावों को अमान्य किया गया है, जो ठीक नहीं है।

खुद जाउंगा आदिवासियों के बीच, लापरवाही पर होगी कार्रवाई – शिवराज

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं आदिवासियों के बीच जाकर इस बात का परीक्षण करेंगे कि किसी पात्र आदिवासी का वनाधिकार पट्टे का दावा निरस्त तो नहीं किया गया। यदि ऐसा पाया गया तो संबंधित अधिकारी के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने मंत्री  विजय शाह एवं  मीना सिंह से कहा कि वे भी जाकर वनाधिकार दावों संबंधी परीक्षण करें।

एक-एक दावे का पुन: करे परीक्षण, कोई आदिवासी पट्टे से ना हो वंचित

बैठक में बताया गया कि ग्राम वन अधिकार समितियों द्वारा अभी तक लंबित एक लाख 67 हजार 108 दावों में से 92 हजार 470 दावों का निराकरण किया गया है। इन दावों में से 36 हजार 241 (39.19 प्रतिशत) दावों को मान्य किया गया है तथा 56 हजार 229 (60.8 प्रतिशत) दावों को अमान्य किया गया है। इस पर मुख्यमंत्री चौहान द्वारा नाराजगी जाहिर करते हुए निर्देश दिए गए कि एक-एक दावे का पुन: परीक्षण किया जाए। कोई भी पात्र आदिवासी वनाधिकार पट्टे से वंचित नहीं रहना चाहिए।

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