नाथ का हमला, ‘जब राहुल गांधी ने आगाह किया था, तब सरकार गिराने में व्यस्त थी भाजपा’

नाथ का हमला, ‘जब राहुल गांधी ने आगाह किया था, तब सरकार गिराने में व्यस्त थी भाजपा’

भोपाल| कोरोना संकट के बीच प्रदेश में सियासत भी गर्म है| कांग्रेस लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से शिवराज सरकार और भाजपा पर निशाना साध रही है| पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कोरोना महामारी के खिलाफ सरकार के इंतजामों पर सवाल उठाते हुए हमला बोला है| उन्होंने ट्वीट कर कहा है जब राहुल गाँधी ने खतरे को लेकर आगाह किया था तब भाजपा सरकार गिराने और बागी विधायकों की सेवा में लगी थी|

पूर्व सीएम कमलनाथ ने ट्वीट कर लिखा- “जब राहुल गांधी फ़रवरी माह में कोरोना के संभावित ख़तरे से आगाह कर रहे थे तब उनका उपहास उड़ाया जा रहा था , जब मध्यप्रदेश की सरकार को गिराने में भाजपा लगी होकर , यहाँ के बाग़ी विधायकों को बेंगलुरु में सेवा देने में सब व्यस्त थे। उस समय कोरोना , इनके लिये डरोना मात्र था।

उन्होंने अपने अगले ट्वीट में लिखा- “देश भर से पलायन कर रहे मज़दूरों के लिये कोई योजना नहीं , ग़रीब वर्ग के खाने-पीने का कोई इंतज़ाम नहीं , भुखमरी से बचाव के लिये कुछ नहीं , किसान परेशान , आमजन परेशान , राशन व आवश्यक वस्तुओं को लेकर कोई बात नहीं , ज़रूरी आवश्यक स्वास्थ्य उपकरणो का अभाव,अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य इंतज़ामो की कमी और हम देशवासियों से थाली बजवाने और लाइट बंद करवाने के संदेश में ही आज भी लगे हुए है। आज ज़रूरत जिन चीजों की है , उसे छोड़कर ध्यान मोड़ने व भटकाने के काम किये जा रहे है।यह भाजपा की पुरानी आदत है”।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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