पहले बताओ मेहमान के घर का पता, तब ही मिलेगा ट्रेन का टिकट

जबलपुर

भोपाल। ट्रेन (Train) का सफर अब पहले जैसा नहीं रहा। अब अगर ट्रेन में सफर करना है तो भरना पड़ेगा रिजर्वेशन फार्म।दरअसल अब ट्रेन मे सफर करने वाले यात्री को एक रिजर्वेशन फॉर्म(Reservation form) भरना होगा। इस फार्म में उसे यह बताना होगा कि आप जिस शहर मे जा रहे हैं। वहां आप अपने किसी रिलेटिव के यहां रूकने वाले हैं या किस होटल में रूकने जा रहे हैं।

रिलेटिव (relative) और होटल (hotel) का पूरा पता, नाम,एरिया, पिन कोर्ड,शहर, जिला, सहित सभी जानकारी फार्म में भरनी होंगी और अगर आप यह जानकारी किसी कारणवश नहीं दे पाए तो आपको ट्रेन का टिकट नही दिया जाएगा। दरअसल रेलवे ने कोरोना संक्रमण के चलते यह सुविधा शुरू की है।बीती 1 जून से रेलवे ने दुबारा 200 ट्रेन देशभर में शुरू की हैं, जिसके लिए 25 मई से रिजर्वेशन प्रकिया शुरू हो गई थी।

अभी तक देनी होती बस यह जानकारी
ट्रेन टिकट रिजर्वेशन के दौरान भरे जाने वाले फार्म में अभी तक यात्री केवल अपना नाम,पता और मोबाइल नंबर भरते थे। कितनी बार यह भी होता था कि जो व्यक्ति अपने परिचितों का रिजर्वेशन कराने पहुंचा है वो इस फार्म को भरते समय सफर करने वाले यात्री की जानकारी की बजाए अपनी जानकारी भर देता था, लेकिन अब इसमें यात्रियों की ही डिटेल भरती होगी। पिन कोड सहित पते की पूरी जानकारी के बिना भूल जाइए कि आप ट्रेन में सफर कर सकते हैं….

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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