पूर्व मंत्री का बड़ा बयान, किराना दुकान की तरह खुले शराब दुकानें, शराबबंदी हो तो सौ फीसदी हो

पूर्व मंत्री का बड़ा बयान, किराना दुकान की तरह खुले शराब दुकानें, शराबबंदी हो तो सौ फीसदी हो

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मुरैना में जहरीली शराब से कई मौतों के बाद प्रदेश में शराबबंदी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वहीं दूसरी तरफ शराब दुकानें बढ़ाने के विचार भी सामने आ रहे हैं। इस बीच बीजेपी के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा ने शराबबंदी पर बड़ा बयान दिया है।

ग्वालियर में पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा ने शराबबंदी और नई आबकारी नीति के मुद्दे पर कहा कि मध्यप्रदेश में शराबबंदी हो तो पूरी शत प्रतिशत हो, डॉक्टर के प्रिसक्रिप्शन पर भी शराब नहीं मिले और अगर खुले तो किराने की दुकान की तरह हर क्षेत्र को नजदीक के स्थान की दुकान पर शराब मिले। अवैध शराब के कारोबार को रोकने उन्होंने शराब दुकानें बढ़ाए जाने के मुद्दे पर अपनी सहमति जताई है।

बता दें कि इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती प्रदेश में शराबबंदी की पैरवी कर चुकी हैं, उनका कहना है कि हर तरह के अपराध की जड़ शराब ही है, राजस्व के लिए सरकार अन्य विकल्प खोज सकती है। उन्होंने बीजेपी शासित राज्यों में शराबबंदी की मांग की है। इधर, गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी अवैध शराब की बिक्री रोकने शराब की दुकानें बढ़ाने की बात कही थी। हालांकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यह साफ कर चुके हैं कि फिलहाल नई दुकानें खोलने को लेकर अभी कोई विचार नहीं किया गया है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews