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गम्मत : निमाड़ अंचल की पारंपरिक लोक कला, गीत-संगीत हास्य और व्यंग्य का मिला जुला संगम

Written by:Shruty Kushwaha
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गम्मत लोक कला सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह निमाड़ की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। इसकी अनूठी शैली और सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व इसे विशेष बनाते हैं। हालांकि, बदलते समय के साथ इसे संरक्षित और प्रचारित करने की आवश्यकता है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ इस कला से प्रेरणा ले सकें और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रह सकें।
गम्मत : निमाड़ अंचल की पारंपरिक लोक कला, गीत-संगीत हास्य और व्यंग्य का मिला जुला संगम

सांकेतिक तस्वीर

Gammat, Nimad Region Traditional Folk Art : क्या आपने ‘गम्मत’ शब्द सुना है। इस शब्द का इस्तेमाल मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र सहित कुछ और स्थानों पर ‘मज़ाक’ के संदर्भ में किया जाता है। लेकिन मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल में ‘गम्मत’ एक प्रसिद्ध लोक कला का नाम है। लोक कला..जो किसी विशेष समुदाय, संस्कृति या क्षेत्र के लोगों द्वारा पारंपरिक रूप से तैयार और प्रस्तुत की जाती है। गम्मत को एक प्रकार का लोकनाट्य कहा जा सकता है, जिसमें नृत्य, गीत, संगीत और हास्य की प्रमुख भूमिका होती है।

लोककलाएं आमतौर पर सामूहिक अनुभव, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का प्रतिनिधित्व करती हैं। इनका प्रमुख उद्देश्य समाज के विभिन्न पहलुओं को स्थानीय भाषा, व्यवहार आदि को मनोरंजक तरीके से दर्शाना होता है। लोक कलाओं में नृत्य, संगीत, नाटक और नाट्य प्रदर्शनी, कला-शिल्प, कहानी वाचन, त्योहार मेले जैसे आयोजन शामिल होते हैं। गम्मत को हम नाटक, नृत्य और संगीत का मिला जुला रूप मान सकते हैं।

निमाड़ की लोक कला गम्मत: एक सांस्कृतिक धरोहर

निमाड़..मध्य प्रदेश के मालवा और सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं के बीच बसा एक समृद्ध सांस्कृतिक क्षेत्र है। यहां की अपनी विशेषताएं है और ये अंचल अपनी अनूठी लोक कलाओं के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां की प्रमुख लोक कलाओं में से एक है ‘गम्मत, जो ग्रामीण अंचलों में प्राचीन समय से मनोरंजन का माध्यम। गम्मत न केवल निमाड़ क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान है, बल्कि यह वहां के सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना को सरल और मनोरंजक ढंग से प्रस्तुत करने का माध्यम भी है।

गम्मत का स्वरूप

गम्मत को एक प्रकार का लोकनाट्य कहा जा सकता है, जिसमें नृत्य, गीत, संगीत और हास्य की प्रमुख भूमिका होती है। यह एक मनोरंजन-प्रधान कला है, जिसमें जीवन की विविधताओं, ग्रामीण समस्याओं, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को हंसी-मजाक और व्यंग्य के साथ मंचित किया जाता है। इसे पारंपरिक रूप से मेलों, धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के अवसर पर प्रस्तुत किया जाता है। गम्मत का प्रदर्शन आमतौर पर समूह में किया जाता है, जिसमें पुरुष और महिलाएं दोनों भाग लेते हैं।

गम्मत के प्रमुख तत्व

  1. नृत्य और संगीत : गम्मत में स्थानीय लोकगीतों और वाद्ययंत्रों का विशेष महत्व है। ढोल, मृदंग, मंजीरा, और नाल जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग होता है, जो इसे एक लयबद्ध और जीवंत रूप प्रदान करते हैं।
  2. हास्य और व्यंग्य : गम्मत के मंचन में हास्य और व्यंग्य की प्रमुख भूमिका होती है। सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर व्यंग्यात्मक संवाद और नाटकीयता से यह लोक कला दर्शकों का ध्यान आकर्षित करती है।
  3. सामाजिक संदेश : गम्मत के माध्यम से कलाकारों द्वारा समाज के विभिन्न वर्गों और स्थितियों पर प्रकाश डाला जाता है। यह कला मनोरंजन के साथ-साथ समाज में जागरूकता फैलाने का भी कार्य करती है।

गम्मत का ऐतिहासिक महत्व

गम्मत का इतिहास कई शताब्दियों पुराना है। निमाड़ के ग्रामीण अंचलों में इसका उदय मुख्य रूप से आम जनमानस के मनोरंजन के लिए सामूहिकता के रूप में हुआ। निमाड़ की यह लोक कला समय के साथ विकसित होती गई और इसे हर पीढ़ी में अलग-अलग तरीकों से प्रस्तुत किया गया। हालांकि, आधुनिकता और शहरीकरण के प्रभाव के कारण गम्मत जैसी पारंपरिक कलाओं की लोकप्रियता में कमी आई है, लेकिन आज भी यह निमाड़ी समाज की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है।

संरक्षण की चुनौतियां और प्रयास

गम्मत जैसी पारंपरिक लोक कलाओं को संरक्षित रखने के लिए अब कई संस्थान और सांस्कृतिक समूह प्रयासरत हैं। मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक संस्थाएं और लोक कलाकारों के समूह ग्रामीण क्षेत्रों में गम्मत के प्रदर्शन का आयोजन करते हैं, जिससे यह कला जीवित रह सके। इसके अलावा, राज्य सरकार भी समय-समय पर लोक कला मेलों और महोत्सवों का आयोजन करती है, जिसमें गम्मत जैसे प्रदर्शन को प्रमुखता दी जाती है।

 

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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