जनधन खाताधारकों के लिए अच्छी खबर, कल से जमा होंगे 500 रुपए

जनधन खाताधारकों के लिए अच्छी खबर, कल से जमा होंगे 500 रुपए

भोपाल| कोरोना वायरस को लेकर देश भर में लागू लॉकडाउन के बीच गरीबों को राहत पहुँचाने के उद्देश्य से केंद्र की मोदी सरकार जनधन योजना के महिला बैंक खाताधारकों के खाते में 500 रुपए जमा कराएगी| यह राशि आगामी तीन माह तक जमा की जाएगी। इसकी शुरुआत कल 3 अप्रैल से होगी। इस संबंध में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति ने सभी बैंकों को निर्देश जारी कर दिए है।

इसके लिए स्टेट लेवल बैंकर्स कमिटी ने सभी बैंकर्स को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सॉयल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए राशि का वितरण बैंक करेंगे| इसके लिए बैंकों के खुलने का समय भी सुबह 10 से शाम 5 बजे तक किया गया है| बैंकों पर भीड़ न हो, इसके लिए अलग अलग दिन खाता नम्बर के आधार पर निर्धारित किए है। बैंक खातों में यह राशि कल सुबह जमा हो जाएगी। इसी दिन अलग अलग बैंकों से राशि वितरण भी शुरू कर दिया जाएगा।

देश में लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों को पैसा पहुंचाने के मकसद से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में जनधन खाते में अगले तीन महीनों तक प्रत्येक महीने 500 रुपये डालने का ऐलान किया है। वित्त मंत्री के इस ऐलान के बाद देश की करीब 20 करोड़ महिलाओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा। पहली किस्त 3 अप्रैल को खाताधारकों के एकाउंट में जमा होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने तारीखों का ऐलान कर दिया है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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