सरकार ने बदला फैसला, अब शराब दुकानों पर सिर्फ पुरुष कर्मचारियों की होगी तैनाती

सरकार ने बदला फैसला, अब शराब दुकानों पर सिर्फ पुरुष कर्मचारियों की होगी तैनाती

भोपाल| मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में शराब की दुकानों (Liquor Shops) पर महिलाओं के बैठाए जाने के फैसले पर मचे बवाल के बाद अब आबकारी विभाग ने नया आदेश जारी कर दिया है| सरकार ने शराब दुकानों से महिला कर्मचारियों को हटा दिया है| महिला कर्मचारियों को शराब की दुकान में तैनात करने पर जमकर सियासत हो रही थी| कांग्रेस ने इसको लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी| वहीं सरकार की किरकिरी हो रही थी|

आबकारी आयुक्त ने सभी कलेक्टर्स को निर्देशित किया है कि देशी/विदेशी मदिरा दुकानों के विभागीय संचालन की स्थिति में विक्रयकर्ता एवं चौकीदार के रूप में केवल पुरुष कर्मचारियों की ही ड्यूटी लगाई जाये। आबकारी विभाग, नगर सैनिक एवं आउटसोर्स एजेंसी से प्राप्त पुरुष कर्मचारियों को इस कार्य में लगाया जाये।

दरअसल, पिछले दिनों आबकारी विभाग ने महिला अफसरों को शराब दुकानों पर ड्यूटी पर तैनात कर दिया। ऐसा होने के बाद मध्य प्रदेश में सियासी तूफान खड़ा हो गया। उपचुनाव के मुहाने पर खड़े मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने शिवराज सरकार को शराब दुकानों में महिलाओं की ड्यूटी लगाने पर जमकर घेराबंदी की| इस बीच सागर में शिक्षकों की ड्यूटी भी शराब दुकानों पर लगा दी गई| इस पर भी बवाल हुआ, आनन् फानन में कलेक्टर ने शिक्षकों की ड्यूटी लगाने का आदेश निरस्त करवा दिया|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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