किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज देगी सरकार

किसान सम्मान निधि

भोपाल| राज्य सरकार अगले खरीफ एवं रबी सीजन के लिए भी शून्य फीसदी ब्याज दर पर किसानों को कर्ज देगी। शनिवार को वित्त और सहकारिता विभाग के अफसरों के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह निर्णय लिया है। कमलनाथ सरकार के आने के बाद किसानों की इस सुविधा पर संशय की स्थिति बनी थी, अब शिवराज सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें बिना ब्याज के कर्ज का लाभ मिलता रहेगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि किसान हमारी प्राथमिकता हैं। मध्यप्रदेश सरकार निरंतर किसानों के कल्याण के लिए कार्य करती रही है। कोरोना संकट की इस घड़ी में हम किसानों को अतिरिक्त सुविधाएं देंगे। प्रदेश में कृषि गतिविधियों को अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि किसानों को प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से कृषि वर्ष 2018-19 में जीरो प्रतिशत ब्याज दर पर जो फसल ऋण दिया गया था, उसके भुगतान की तारीख पूर्व में 28 मार्च थी, जिसे अब किसानों की सुविधा के लिए बढ़ाकर 31 मई 2020 किया गया है।

खरीफ सीजन 2019 में करीब 20 लाख किसानों ने साढ़े आठ हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। सहकारी बैंकों के माध्यम से प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कृषि ऋण उपलब्ध कराती हैं। इसमें 65 फीसदी हिस्सा नकद राशि के रूप में दिया जाता है। शेष हिस्से की सामग्री दी जाती है। सरकार ने कर्ज चुकाने की मियाद दूसरी बार बढ़ाकर 31 मई कर दी है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews