कोरोना काल में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाओं को लेकर सरकार का बड़ा फैसला

कोरोना काल में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाओं को लेकर सरकार का बड़ा फैसला

भोपाल| कोरोना संकट काल में शिवराज सरकार ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया है| महिला-बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय / राज्य स्तरीय आपदा प्रबंधन अधिनियमके अंतर्गत यदि आँगनवाड़ी कार्यकर्ता/सहायिका की ड्यूटी लगाई जाती है और इस दौरान उनकी मृत्यु हो जाती है तो उसके परिवार की महिला सदस्य को आँगनवाड़ी कार्यकर्ता/सहायिका के पद पर नियुक्ति दी जायेगी।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में सर्वव्यापी महामारी कोविड-19 में आँगनवाड़ी कार्यकर्ता/सहायिका भी कोरोना योद्धा के रूप में कार्य कर रही है। अत: यह निर्णय लिया गया है कि आँगनवाड़ी कार्यकर्ता/सहायिका कोविड-19 के दौरान कर्त्तव्य पालन करते हुए दिवंगत होने पर तथा भविष्य में राष्ट्रीय/राज्य स्तरीय आपदा घोषित होने पर अगर इनकी ड्यूटी लगाई जाती है और इस दौरान उनकी मृत्यु हो जाती है तो उसके परिवार की महिला सदस्य, निर्धारित अर्हताएँ पूर्ण करती है, तो ऐसी स्थिति में नियुक्तिकर्ता अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी द्वारा उन्हें सीधे नियुक्त किया जायेगा।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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