राज्यपाल ने परीक्षाओं के लिए गठित की 6 सदस्यीय समिति

राज्यपाल ने परीक्षाओं के लिए गठित की 6 सदस्यीय समिति

भोपाल| राज्यपाल लालजी टंडन (Governor Lalji Tandon) ने विश्वविद्यालयीन परीक्षाओं (University examinations) के परीक्षा कार्यक्रम निर्धारण और अकादमिक कैलेंडर के पुनर्नियोजित करने की आवश्यकता प्रतिपादित करते हुए कहा है कि कोविड-19 की गाइड लाइन्स का पालन करते हुए परीक्षाओं का कार्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिये है। श्री टंडन ने इसके लिए उच्च स्तर पर चिंतन-मनन कर कार्रवाई के लिए 6 सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। जीवाजी विश्वविद्यालय की कुलपति संगीता शुक्ला को समिति का संयोजक बनाया है। समिति में 5 कुलपति और उच्च शिक्षा विभाग (Higher Education Department) द्वारा नामांकित एक प्रतिनिधि को शामिल किया गया है। समिति को आगामी 8 मई तक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया है।

राज्यपाल के सचिव मनोहर दुबे ने बताया कि समिति द्वारा समस्त आयुर्विज्ञान, प्रोद्यौगिकी और कृषि विश्वविद्यालयों के साथ चर्चा कर परीक्षा कार्यक्रम एवं अकादमिक कैलेंडर तैयार किया जाएगा। समिति के सदस्यों में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.जे.राव, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीयूष अग्रवाल, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति प्रो. सुनील कुमार और भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रो. जयंत सोनवलकर को शामिल किया गया है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews