सिंधिया समर्थकों पर गोविंद सिंह का निशाना, कांग्रेस के खिलाफ जाने वाले पार्टी छोड़ दें

सिंधिया समर्थकों पर गोविंद सिंह का निशाना, कांग्रेस के खिलाफ जाने वाले पार्टी छोड़ दें

भोपाल। सहकारिता मंत्री डॉक्टर गोविन्द सिंह ने सिंधिया समर्थकों को आड़े हाथों लिया है। आपको बता दें कि सिंधिया सर्मथक सोशल मीडया पर स्वर्गीय माधवराव सिंधिया की पार्टी पुनर्जीवित करने की मांग कर रहे हैं। इसपर सहकारिता मंत्री ने कड़ी नाराज़गी जताते हुए कहा है कि जो लोग इस तरह की बातें कर रहे हैं उनको तत्काल पार्टी छोड़ देना चाहिए। उन्होने कहा कि वे पार्टी संगठन से अपील करेंगे कि ऐसे लोगो की पार्टी से निकाल दें, जिनकी पार्टी में निष्ठा नहीं है उन्हें एक भी मिनिट भी पार्टी में रहने का अधिकार नहीं है।

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के भारत दौरे को लेकर उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ये फैला रहे हैं कि ट्रम्प हमारे दोस्त है उनको भारत लेकर बड़ी घोषणा करवाऊँगा। मोदी जी ये चाहते थे कि ट्रम्प से कोई फर्जी घोषणा करवाएं लेकिन मैं अमेरिका के राष्ट्रपति को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने पहले ही सब साफ कर दिया कि वो कोई घोषणा नहीं करेंगे। गोविंद सिंह ने कहा कि मोदी और आरएसएस का एजेंडा ही है झूठ बोलो षडयंत्र फैलाओ और वे झूठ के दम पर ही सत्ता में आये हैं। प्रियंका गांधी को मप्र से राज्यसभा भेजे जाने की मांग को लेकर सहकारिता मंत्री का कहना है कि कार्यकर्ताओ को अतिउत्साहित होना ठीक नहीं हैं क्या ये माँग जो वे उठा रहे है उसे लेकर प्रियंका गांधी से बात की है, प्रियंका गांधी अगर चाहे तो खुद ये फैसला ले सकती हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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