कोटा भी ज्यादा, आवेदन भी कम, फिर भी कई के हिस्से आएगी मायूसी

कोटा भी ज्यादा, आवेदन भी कम, फिर भी कई के हिस्से आएगी मायूसी

भोपाल। पिछले बरस प्रदेश को मिले कुल कोटे से कुछ सैकड़ा ज्यादा सीटें इस बार सूबे के हिस्से में हैं। ऑनलाइन व्यवस्था के चलते आवेदन की तादाद भी पिछले बरस की तुलना में बहुत कम है। बाजवूद इसके प्रदेश के उन अकीदतमंदों के हिस्से में मायूसी हाथ आना है, जिन्होंन हज : 2020 के लिए अर्जी लगाई है। 12 हजार से ज्यादा आवेदनों में से एक तिहाई कोटे के मुताबिक करीब पांच हजार हाजियों का चयन किया जाना है। शनिवार को ऑनलाईन कुर्रा का सीधा प्रसारण राजधानी भोपाल में देखा जा सकेगा। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आरिफ अकील की मौजूदगी में होने वाले कुर्राअंदाजी के दौरान शहर और भोपाल रियासत से जुड़े उलेमाओं भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।

हज सफर 2020 के लिए शनिवार को कुर्रा द्वारा हाजियों के नाम तय किए जाएंगे। इस दौरान करीब 12601 आवेदकों को अपने नसीब का फैसला देखने-सुनने को मिलेगा। सेंट्रल हज कमेटी मुंबई में होने वाले कुर्रा का सीधा प्रसारण ऑनलाइन भोपाल में देखने को मिलेगा। इस दौरान प्रदेश को मिले हज कोटे 4864 सीटों में से पहले 70 साल आयुवर्ग के आरक्षित श्रेणी के 667 लोगों के नाम सुरक्षित कर दिए जाएंगे। साथ ही अन्य आरक्षित श्रेणी के करीब 43 आवेदकों के नाम निकालने के बाद बचे हुए 4154 अकीदतमंदों के नाम तय किए जाएंगे। इस स्थिति से प्रदेश के कुल हज अर्जी करने वालों में से करीब एक तिहाई लोगों को ही हज पर जाने का मौका मिलने वाला है, जबकि बाकी दो तिहाई लोगों के हिस्से मायूसी और इंतजार आने वाला है। यह स्थिति भी उस दौर में है, जब प्रदेश को पिछले साल के मुकाबले करीब 224 बढ़ी हुई सीटें मिली हैं। इस बार आवेदन की तादाद भी पिछले साल से कम ही हैं। जहां हज 2019 के दौरान 15 हजार 654 लोगों ने हज के लिए आवेदन किया था, वहीं इस बार आवेदन करने वालों की तादाद 12 हजार 601 ही है।

मुख्यमंत्री कर सकते हैं शिरकत
उम्मीद की जा रही है कि शनिवार को ताजुल मसाजिद में होने वाले हज कुर्रा के दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ भी मौजूद रहेंगे। पिछले बरस हुए हज कुर्रा में उन्होंने शिरकत की थी और उलेमाओं एवं हाजियों से देश-दुनिया की सुख-शांति की दुआ के लिए गुजारिश की थी। पिछले एक साल में मुख्यमंत्री कमलनाथ कमोबेश मुस्लिम समुदाय के किसी बड़े आयोजन में शरीक नहीं हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि इस बार हज कुर्रा में ताजुल मसाजिद आने के दौरान वे मसाजिद कमेटी के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन भी कर सकते हैं। उनके आने से लंबे समय से रुकी हुई ईमाम-मोअज्जिन की तंख्वाह बढ़ोत्तरी की कवायद भी पूरी हो सकती है। तय प्रोग्राम के मुताबिक मुख्यमंत्री अपने हाथों से ईमाम-मोअज्जिन को बढ़ी हुई तंख्वाह का चैक सौंपने वाले हैं। हज कुर्रा कार्यक्रम में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आरिफ अकील के अलावा काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी, मुफ्ती कलाम, मुफ्ती सैयद बाबर, मुफ्ती रईस आदि भी शामिल होंगे। कार्यक्रम में हज कमेटी के सदस्यों की भी मौजूदगी भी रहेगी।

सदस्यों को नहीं मिल रहा अगुवा
कई महीने पहले नियुक्त किए गए हज कमेटी सदस्यों को अब तक एक कमेटी के रूप में आकार नहीं दिया जा सका है। कमेटी में पहली सूची के मुताबिक करीब 11 सदस्यों को नियुक्त किया गया था। जबकि दूसरी किस्त में इसमें 3 सदस्यों को और जोड़ा गया था। नियमानुसार इनमें से किसी एक सदस्य को प्रदेश हज कमेटी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जाना है। लेकिन लंबे समय से रुकी हुई यह प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है। कमेटी में मुफ्ती अब्दुल कलाम, इंदौर शहर काजी इशरत अली, आमिर अकील, अब्दुल मुगनी आदि सदस्य के रूप में मौजूद हैं।

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