मध्यप्रदेश में मंगलवार को मौसम ने अचानक करवट ली और कई जिलों में तेज बारिश के साथ कहीं कहीं ओलावृष्टि भी हुई है। इस प्राकृतिक आपदा से रबी फसलों..खासकर गेहूं, चना, मसूर और सरसों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस आपदा पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर किसानों को त्वरित सहायता मुहैया कराने की मांग की है।
अपने पत्र में उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्रभावित जिलों में तुरंत सर्वे कराया जाए और नुकसान का आकलन जमीनी सच्चाई के आधार पर किया जाए। किसानों को त्वरित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। साथ ही उन्होंने फसल बीमा दावों के भुगतान में तेजी लाने की मांग भी की है।
बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान
27 जनवरी की शाम से प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि भी हुई। मौसम विभाग के अनुसार, हरियाणा के ऊपर सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन, पश्चिमी विक्षोभ और क्षेत्र से गुजर रही ट्रफ के कारण यह बदलाव आया है। इस कारण प्रदेश में बारह से अधिक जिलों में मध्यम से भारी बारिश, बिजली कड़कने और ओले गिरे, जिससे खेतों में खड़ी रबी फसलें बुरी तरह प्रभावित होने की खबरें हैं। कई जगहों पर ओले इतने बड़े और तेज गिरे कि खेतों में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। इस कारण खेतों में गेहूं, चना, मसूर, सरसों, आलू, लहसुन और प्याज जैसी फसलें आड़ी पड़ गईं, बालियां टूट गईं और दाने झड़ गए हैं। किसानों का कहना है कि कटाई बस कुछ हफ्तों दूर थी, लेकिन अब पूरी मेहनत पर पानी फिर गया।
जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
प्रदेश में मौसम के अचानक बदलने और फसलों को हुए नुकसान को लेकर जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखा है। अपने उन्होंने पत्र में कहा है कि रबी फसलें कटाई के नजदीक थी और इसी समय बारिश-ओलावृष्टि से किसानों की मेहनत बर्बाद हो गई है। उन्होने लिखा है कि किसान पहले से ही बढ़ते कर्ज, महंगी बीज-खाद और सिंचाई लागत से जूझ रहे हैं ऐसे में प्रभावित जिलों में तुरंत गिरदावरी/सर्वे कराया जाए तथा नुकसान का आकलन जमीनी सच्चाई के आधार पर किया जाए और किसानों को त्वरित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा, उन्होंने फसल बीमा दावों के भुगतान में तेजी लाने की भी मांग भी की है। कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्र में यह भी लिखा इस प्राकृतिक आपदा से किसान मानसिक और आर्थिक स्तर पर टूटने की स्थिति में हैं इसलिए सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए राहत कार्यों को घोषणाओं तक सीमित न रखकर जमीन पर लागू करना चाहिए।





